जगन्नाथ मंदिर में स्नान यात्रा: 108 स्वर्ण कलशों से होगा महास्नान
जगन्नाथ मंदिर में पारंपरिक स्नान यात्रा
नई दिल्ली: ओडिशा के प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर में आज, 29 जून 2026, सोमवार को पारंपरिक 'स्नान यात्रा' का आयोजन किया जा रहा है। ज्येष्ठ पूर्णिमा के इस पावन अवसर पर होने वाला यह स्नान, 16 जुलाई 2026 को होने वाली भव्य रथ यात्रा की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए महाप्रभु जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा को विशेष सोने के कुएं से लाए गए ठंडे जल से स्नान कराया जाता है। इस महास्नान उत्सव को देखने के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचे हैं।
महास्नान की विशेषता
108 स्वर्ण कलशों और जड़ी-बूटियों से महास्नान
इस स्नान यात्रा में तीनों देवी-देवताओं को 108 स्वर्ण कलशों के पवित्र जल से स्नान कराया जाता है। यह ध्यान देने योग्य है कि यह कुआं साल में केवल एक बार इसी दिन खोला जाता है। कुएं से निकाले गए जल में चंदन, कपूर, केसर, इत्र और औषधीय जड़ी-बूटियां मिलाई जाती हैं।
महास्नान के बाद का श्रृंगार
महास्नान के बाद भव्य श्रृंगार
महास्नान के बाद भगवान का विशेष श्रृंगार किया जाता है, जिसे 'गजवेश' या गणेश वेश कहा जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान गणेश के एक भक्त की इच्छा पूरी करने के लिए भगवान जगन्नाथ ने उन्हें गजानन रूप में दर्शन दिए थे। इसी स्मृति में भगवान को हाथी के मुख वाले दिव्य रूप में सजाया जाता है।
भगवान का एकांतवास
15 दिनों के एकांतवास में जाएंगे भगवान
इस स्नान के तुरंत बाद एक अनोखी परंपरा शुरू होती है। अत्यधिक स्नान के कारण तीनों देवता बीमार पड़ जाते हैं। आज से लेकर आषाढ़ अमावस्या तक, यानी अगले 15 दिनों तक भगवान मुख्य मंदिर से दूर एकांतवास में चले जाते हैं, जिसे 'अनावसार काल' कहा जाता है। इस दौरान मुख्य मूर्तियों के दर्शन बंद रहते हैं। भक्तों की आस्था बनाए रखने के लिए इस अवधि में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा की विशेष पारंपरिक पेंटिंग्स को वैकल्पिक प्रतिमा के रूप में स्थापित कर पूजा की जाती है।
काढ़े का भोग और रथ यात्रा
काढ़े का भोग और 16 जुलाई को रथ यात्रा
एकांतवास के दौरान, मंदिर के मुख्य पुजारी भगवान को विभिन्न जड़ी-बूटियों से तैयार काढ़े और औषधियों का भोग लगाते हैं। यह परंपरा दर्शाती है कि भगवान भी इंसानी रूप में बीमार होते हैं और विश्राम करते हैं। 15 दिन बाद, भगवान 'नवयौवन रूप' में भक्तों को दर्शन देंगे। इसके बाद, 16 जुलाई 2026 को भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा जी तीन विशाल दिव्य रथों पर सवार होकर गुंडिचा मंदिर के लिए प्रस्थान करेंगे, जिसकी रस्सियां खींचने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।