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जन्माष्टमी 2026: तुलसी पूजा के महत्व और नियम

जन्माष्टमी 2026 पर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा का विशेष महत्व है, जिसमें तुलसी दल चढ़ाने की परंपरा शामिल है। इस वर्ष जन्माष्टमी का व्रत 4 सितंबर को है। जानें तुलसी के पत्तों को कैसे और कब तोड़ना चाहिए, और पूजा के दौरान क्या नियम अपनाने चाहिए। इस लेख में तुलसी पूजा के महत्व और विशेष उपायों के बारे में जानकारी दी गई है, जो आपको इस पावन अवसर पर सही तरीके से पूजा करने में मदद करेगी।
 

जन्माष्टमी पर तुलसी पूजा का महत्व


जन्माष्टमी 2026 तुलसी पूजा: जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण के लड्डू गोपाल स्वरूप की पूजा का विशेष महत्व है। इस दिन तुलसी दल चढ़ाने की परंपरा भी निभाई जाती है। इस वर्ष जन्माष्टमी का व्रत 4 सितंबर को मनाया जाएगा।


जन्माष्टमी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना वर्जित है, इसलिए भगवान श्रीकृष्ण के भोग के लिए तुलसी के पत्ते एक दिन पहले ही तोड़कर रख लेना चाहिए।


ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, तोड़े गए तुलसी के पत्ते 11 दिनों तक बासी या अशुद्ध नहीं माने जाते हैं, जिन्हें पूजा के समय साफ पानी से धोकर उपयोग किया जा सकता है।


जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए तुलसी से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण नियम और उपाय निम्नलिखित हैं:


भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित किए जाने वाले माखन-मिश्री, पंचामृत या छप्पन भोग में तुलसी का पत्ता अवश्य डालें। तुलसी के बिना कान्हा भोग स्वीकार नहीं करते हैं।


तुलसी दल को हमेशा भगवान श्रीकृष्ण के हाथों में या भोग प्रसाद के ऊपर रखें, उनके चरणों में न अर्पित करें।


जन्माष्टमी की शाम को तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक अवश्य जलाएं।