ज्येष्ठ मास के बड़े मंगल का महत्व और पूजा विधि
बड़े मंगल का महत्व
नई दिल्ली - ज्येष्ठ मास के मंगलवारों को सनातन धर्म में विशेष महत्व दिया जाता है। इन्हें बड़े मंगल या बुढ़वा मंगल के नाम से जाना जाता है। इस वर्ष अधिकमास के चलते ज्येष्ठ महीने में कुल आठ बड़े मंगल मनाए जा रहे हैं। मंगलवार, 16 जून को सातवां बड़ा मंगल है, जिसके चलते देशभर के हनुमान मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ देखी जा रही है।
धार्मिक मान्यताएँ
धार्मिक मान्यता के अनुसार, बड़े मंगल के दिन विधिपूर्वक बजरंगबली की पूजा करने और व्रत रखने से सभी इच्छाएँ पूरी होती हैं। ज्योतिष शास्त्र में भी इस दिन का विशेष महत्व है। माना जाता है कि इस दिन की गई पूजा से कुंडली में मंगल ग्रह की स्थिति मजबूत होती है और शनि की साढ़ेसाती तथा ढैय्या के दुष्प्रभावों से राहत मिलती है।
पूजा का शुभ समय
पूजा-अर्चना के लिए प्रातःकाल और संध्या का समय विशेष रूप से शुभ माना जाता है। अमृत काल सुबह 5:45 बजे से 7:25 बजे तक रहेगा, जबकि अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:50 बजे से 12:45 बजे तक है। संध्या आरती का समय शाम 6:30 बजे से 7:45 बजे तक निर्धारित किया गया है।
विशेष भोग और अर्पण
धर्माचार्यों के अनुसार, बड़े मंगल के दिन हनुमान जी को उनकी प्रिय वस्तुएं अर्पित करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। श्रद्धालु भगवान को लाल गुड़हल के फूल, चमेली का तेल, केसरिया सिंदूर, मीठा पान, बूंदी या बेसन के लड्डू, और घी-गुड़ से बना चूरमा या मीठी रोटी का भोग लगा सकते हैं।
भक्ति का फल
मान्यता है कि श्रद्धा और भक्ति से की गई पूजा संकटमोचन हनुमान भक्तों के सभी कष्ट दूर करती है और सुख, समृद्धि तथा सफलता का आशीर्वाद प्रदान करती है।