ज्येष्ठ माह में चार एकादशी: तिथियाँ और पारण का समय जानें
एकादशी का महत्व
एकादशी का व्रत और विष्णु जी का पूजन करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है
सनातन धर्म में एकादशी का व्रत अत्यंत पवित्र माना जाता है। हर महीने में दो बार, कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर यह व्रत रखा जाता है। भगवान विष्णु को समर्पित इस व्रत का महत्व बहुत अधिक है। इस दिन भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, एकादशी का व्रत और विष्णु जी की पूजा से जीवन में सुख-समृद्धि और मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है।
ज्येष्ठ माह में एकादशी व्रत
इस वर्ष ज्येष्ठ माह में अधिकमास होने के कारण चार एकादशी व्रत का विशेष संयोग बन रहा है। इस माह में सबसे प्रमुख एकादशी, निर्जला एकादशी, भी आती है। इसके अलावा, अपरा एकादशी, पद्मिनी एकादशी और परमा एकादशी का भी व्रत रखा जाएगा। आइए जानते हैं इन व्रतों की तिथियाँ और पारण का समय।
अपरा एकादशी
- ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अपरा एकादशी कहा जाता है।
- पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी तिथि 12 मई को दोपहर 02:52 बजे से शुरू होगी और 13 मई को दोपहर 01:30 बजे तक रहेगी।
- उदयातिथि के अनुसार, 13 मई को अपरा एकादशी का व्रत रखा जाएगा।
- अपरा एकादशी का पारण 14 मई को सुबह 06:04 से 08:41 बजे तक होगा।
पद्मिनी एकादशी
- अधिकमास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को पद्मिनी एकादशी कहते हैं।
- यह तिथि 26 मई की रात 10:24 बजे से शुरू होगी और 27 मई की रात 12:44 बजे समाप्त होगी।
- उदयातिथि के अनुसार, 27 मई को पद्मिनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा।
- पद्मिनी एकादशी का पारण सुबह 05:25 से 08:08 बजे तक करना शुभ रहेगा।
परमा एकादशी
परमा एकादशी अधिकमास के शुक्ल पक्ष में आती है। इस वर्ष यह व्रत 11 जून 2026, गुरुवार को रखा जाएगा, और इसका पारण 12 जून को किया जाएगा।
निर्जला एकादशी
ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी तिथि 24 जून 2026 की शाम 06:12 बजे से शुरू होगी और 25 जून की रात 08:09 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार, 25 जून को निर्जला एकादशी का व्रत रखा जाएगा। इसका पारण 26 जून की सुबह 05:25 से 08:13 बजे के बीच किया जाएगा।