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तीसरा मंगला गौरी व्रत: सावन में विशेष पूजा का महत्व

तीसरा मंगला गौरी व्रत, जो सावन के महीने में मनाया जाता है, विवाहित महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन, महिलाएं माता गौरी की पूजा करती हैं, ताकि उनके पति की लंबी उम्र और सुखद दांपत्य जीवन की कामना की जा सके। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यह व्रत मंगल ग्रह के अशुभ प्रभावों को कम करने में भी सहायक होता है। जानें इस व्रत के पीछे की धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताएं।
 

तीसरा मंगला गौरी व्रत


तीसरा मंगला गौरी व्रत: हिंदू धर्म में सावन का महीना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा की जाती है। हर मंगलवार को मंगला गौरी व्रत का आयोजन किया जाता है। आज, 18 अगस्त को तीसरा मंगला गौरी व्रत मनाया जा रहा है। इस दिन, विवाहित महिलाएं माता गौरी की पूजा करती हैं, ताकि उनके पति की लंबी उम्र, सुखद वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति हो सके। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव और माता पार्वती भक्तों की इच्छाओं को पूरा करते हैं।


माता गौरी की पूजा में सुहाग की सामग्री, फूल, फल और अन्य वस्तुएं अर्पित की जाती हैं। मान्यता है कि माता गौरी को श्रद्धा से स्मरण करने और व्रत रखने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है।


ज्योतिष के अनुसार, यह व्रत कुंडली में मंगल ग्रह के नकारात्मक प्रभावों या मंगल दोष को कम करने में मददगार माना जाता है।


माता गौरी शक्ति और सृजन का प्रतीक हैं। उनकी आराधना से भक्तों में संयम, धैर्य, सकारात्मक ऊर्जा और आत्मबल का विकास होता है।