दशलक्षण पर्व 2025: दिगंबर जैन अनुयायियों के लिए धार्मिक महत्व
दशलक्षण पर्व का महत्व
Daslakshan Parv 2025: जैन धर्म के अनुयायियों के लिए दशलक्षण पर्व का विशेष महत्व है, जिसे क्षमावाणी पर्व, संवत्सरी और पर्यूषण पर्व के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व सबसे पहले श्वेतांबर जैन समुदाय द्वारा 8 दिनों तक मनाया जाता है, जिसके बाद दिगंबर जैन अनुयायी पर्यूषण पर्व की शुरुआत करते हैं। हर साल भाद्रपद महीने में यह पर्व मनाया जाता है। वर्ष 2025 में दिगंबर जैन अनुयायियों का दशलक्षण पर्व 28 अगस्त से प्रारंभ होगा और इसका समापन 6 सितंबर को अनंत चौदस के दिन होगा।
धार्मिक शिक्षाएं
यह पर्व भक्तों को भगवान महावीर के सिद्धांत 'अहिंसा परमो धर्म' का पालन करने की प्रेरणा देता है। इन 10 दिनों में दिगंबर जैन अनुयायी त्याग और संयम के साथ शारीरिक और मानसिक तप से आत्मा की शुद्धि का प्रयास करते हैं। ऐसा माना जाता है कि इससे पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। दशलक्षण पर्व के 10 दिनों का विशेष महत्व है, जिसमें पूजा-पाठ के साथ विभिन्न नियमों का पालन करना आवश्यक होता है। आइए जानते हैं पर्यूषण पर्व के 10 दिनों के धार्मिक महत्व के बारे में।
पर्यूषण पर्व के 10 दिन
प्रथम दिन- उत्तम क्षमा
इस दिन जैन अनुयायी क्षमा के गुणों पर ध्यान केंद्रित करते हैं।
दूसरे दिन- उत्तम मार्दव
दूसरे दिन नम्रता और सरलता को अपने व्यवहार में लाने का प्रयास किया जाता है।
तीसरे दिन- उत्तम आर्जव
तीसरे दिन भावों की शुद्धता पर ध्यान दिया जाता है।
चौथे दिन- उत्तम शौच
इस दिन मन में लोभ न आने का चिंतन किया जाता है।
पांचवें दिन- उत्तम सत्य
पांचवें दिन सत्य के मार्ग पर चलने का प्रयास किया जाता है।
छठे दिन- उत्तम संयम
इस दिन मन, वचन और शरीर पर नियंत्रण का चिंतन किया जाता है।
सातवें दिन- उत्तम तप
सातवें दिन गलत विचारों को दूर करने के लिए तपस्या की जाती है।
आठवें दिन- उत्तम त्याग
आठवें दिन आत्म-शुद्धि के लिए क्रोध, माया और लोभ का त्याग किया जाता है।
नौवें दिन- उत्तम आकिंचन
इस दिन धन-संपत्ति के मोह से मुक्त होकर धर्म की राह पर चलने के लिए प्रेरित किया जाता है।
दसवें दिन- ब्रह्मचर्य
दसवें दिन सद्गुणों का अभ्यास करके खुद को पवित्र रखने पर ध्यान दिया जाता है। इस दिन क्षमावाणी का पर्व भी मनाया जाता है।