दुर्गा विसर्जन के समय कलश सामग्री का महत्व और उपयोग
दुर्गा विसर्जन कलश सामग्री
दुर्गा विसर्जन कलश सामग्री: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, दुर्गा विसर्जन के दौरान कलश की सामग्री का सही उपयोग नवग्रह दोषों को दूर कर घर में सुख और समृद्धि लाता है। कलश में अभिमंत्रित जल, नारियल, सिक्का, अक्षत और ज्वारे का उपयोग कमजोर ग्रहों को मजबूत बनाकर नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करता है।
नवरात्रि कलश जल का विसर्जन के बाद उपयोग
नवरात्रि कलश जल का विसर्जन के बाद उपयोग: नवरात्रि में घट स्थापना एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है, जो ब्रह्मांडीय ऊर्जा और नवग्रहों को आमंत्रित करता है। विसर्जन के दिन कलश के जल, नारियल, सिक्के और ज्वारे का सही ज्योतिषीय उपयोग जन्मकुंडली के कई गंभीर दोषों को शांत कर सकता है। सही विधियों का पालन करने से पूरे वर्ष घर में सकारात्मकता और समृद्धि बनी रहती है।
नवग्रह शांति और विसर्जन
नवग्रह शांति और विसर्जन: ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, स्थापित कलश नवग्रहों का प्रतिनिधित्व करता है। विसर्जन के पावन अवसर पर मां दुर्गा के साथ जया, विजया, शमी और अपराजिता की विशेष पूजा का विधान है।
जल और चंद्र दोष निवारण
जल और चंद्र दोष निवारण: कलश में नौ दिनों तक रखा जल वरुण देव और चंद्र ग्रह की ऊर्जा का केंद्र बन जाता है। यदि कुंडली में चंद्रमा कमजोर है या घर में मानसिक अशांति है, तो आम के पत्तों से इस जल का पूरे घर में छिड़काव करना चाहिए।
धन वृद्धि के उपाय
धन वृद्धि के उपाय: कलश पर रखा नारियल मां लक्ष्मी और देवगुरु बृहस्पति का वास माना जाता है। इसे घर की सुहागिन महिला को सौंपने से दांपत्य जीवन में सुख आता है और शुक्र ग्रह मजबूत होता है।
अक्षत और ज्वारे के लाभ
अक्षत और ज्वारे के लाभ: कलश के नीचे रखे गए अक्षत पूर्णता का प्रतीक हैं। इन अक्षतों को लाल कपड़े में बांधकर मुख्य द्वार पर लटकाने से घर में सुरक्षा घेरा बनता है, जो राहु के दुष्प्रभाव और बुरी नजर को रोकता है।