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नवरात्रि 2026: मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का महत्व और विधि

नवरात्रि 2026 के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का महत्व और विधि जानें। इस दिन भक्त मिशरी, शक्कर और दूध से बनी मिठाइयों का भोग अर्पित करते हैं। मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप तपस्या और संयम का प्रतीक है। जानें किस रंग के कपड़े पहनना शुभ है और कौन से मंत्र का जाप करना चाहिए।
 

नवरात्रि का उत्सव


नई दिल्ली. देशभर में नवरात्रि का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। आज मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप, मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का दिन है। 12 अक्टूबर, सोमवार को भक्तजन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना कर रहे हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी तप, त्याग और साधना का प्रतीक मानी जाती हैं। उनकी पूजा से भक्तों को धैर्य और कठिनाइयों में अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने की प्रेरणा मिलती है।


मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप और महत्व

मां ब्रह्मचारिणी देवी दुर्गा का दूसरा रूप हैं। उनके एक हाथ में जपमाला और दूसरे में कमंडल होता है। यह स्वरूप तपस्या, ज्ञान और आत्मसंयम का प्रतीक है। मान्यता है कि मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से जीवन में धैर्य और कठिन समय में हिम्मत बनाए रखने की प्रेरणा मिलती है।


मां ब्रह्मचारिणी को क्या चढ़ाएं?

नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी को मिशरी और शक्कर का भोग अर्पित किया जाता है। इसके साथ ही दूध, खीर और अन्य दूध से बनी मिठाइयां भी चढ़ाई जा सकती हैं। पूजा में चमेली, कमल या गुड़हल के फूल चढ़ाने की परंपरा है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार सफेद या पीले फूल भी अर्पित कर सकते हैं।


दूसरे नवरात्र पर कौन-सा रंग पहनें?

नवरात्रि के दूसरे दिन सफेद रंग पहनना शुभ माना जाता है। यह रंग शांति और पवित्रता का प्रतीक है। भक्त इस दिन सफेद या पीले रंग के साफ कपड़े पहनकर मां की पूजा कर सकते हैं।


मां ब्रह्मचारिणी के मंत्र

1. बीज मंत्र:
ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥


2. ध्यान मंत्र:
दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥


3. देवी स्तुति मंत्र:
या देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥