नाग पंचमी: 17 अगस्त को मनाने का महत्व और नियम
नाग पंचमी, जो 17 अगस्त को मनाई जाएगी, हिंदू धर्म में नाग देवता की पूजा का महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन विशेष पूजा विधियों का पालन करने से भगवान शिव और विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। जानें इस दिन क्या करना चाहिए और किन कार्यों से बचना चाहिए। इस लेख में नाग पंचमी के नियमों और महत्व के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है।
Aug 13, 2026, 15:58 IST
नाग पंचमी का महत्व
भगवान शिव और विष्णु की कृपा का दिन
नाग पंचमी, हिंदू धर्म में नाग देवता को समर्पित एक महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन नाग देवता की पूजा करने से महादेव का आशीर्वाद प्राप्त होता है और कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है। शास्त्रों में इस दिन कुछ कार्यों को करने से मना किया गया है।
आपके मन में यह सवाल उठ सकता है कि नाग पंचमी पर क्या करना चाहिए और क्या नहीं। इस लेख में हम आपको नाग पंचमी के नियमों के बारे में जानकारी देंगे।
नाग पंचमी कब है?
सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी का पर्व मनाया जाता है। यह दिन नाग देवताओं, भगवान शिव और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का विशेष अवसर है। इस वर्ष यह पर्व 17 अगस्त, सोमवार को मनाया जाएगा।
नाग पंचमी पर क्या करें?
- द्वार पर नाग आकृति: घर के मुख्य द्वार पर गोबर या हल्दी-चंदन से नाग की आकृति बनाएं या तांबे और चांदी के नाग-नागिन के जोड़े की पूजा करें।
- शिव-पूजा और मंत्र जप: शिवलिंग पर जल, दूध, और बेलपत्र अर्पित करें और ॐ नम: शिवाय या ॐ नागदेवताय नम: का जप करें।
- दोष निवारण उपाय: जिनकी कुंडली में कालसर्प दोष है, उन्हें विशेष पूजा, रुद्राभिषेक और नाग-नागिन के जोड़े को जल में प्रवाहित करना चाहिए।
- दान-पुण्य: इस दिन जरूरतमंदों या ब्राह्मणों को धान, दूध, मिष्ठान और वस्त्र का दान करें।
नाग पंचमी पर क्या न करें?
- भूमि खुदाई पर रोक: नाग पंचमी के दिन खेत जोतना या खुदाई करना मना है, ताकि मिट्टी में छिपे सांपों को नुकसान न पहुंचे।
- सर्पों की रक्षा: किसी भी जीवित सर्प को मारना या सताना पाप माना जाता है।
- जीवित सर्प को दूध न पिलाएं: जीवित सांप को दूध न पिलाएं, यह उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है।
- धारदार वस्तुओं से दूरी: इस दिन सुई, धागा, कैंची, और चाकू जैसी नुकीली वस्तुओं का उपयोग न करें।
- लोहे के तवे व कड़ाही का प्रयोग: कई क्षेत्रों में नाग पंचमी के दिन लोहे का तवा या कड़ाही चढ़ाना वर्जित माना जाता है।