नारद जयंती: तिथि, पूजा विधि और महत्व
नारद जयंती हर साल ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाई जाती है। इस दिन देवर्षि नारद का प्रकट होना माना जाता है। पूजा विधि में भगवान विष्णु और नारद जी की पूजा का विशेष महत्व है। जानें इस दिन की तिथि, मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में, जिससे जीवन में सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
May 2, 2026, 10:20 IST
नारद जयंती का महत्व
हर वर्ष ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि को नारद जयंती का पर्व मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन देवर्षि नारद का प्रकट होना माना जाता है। पौराणिक कथाओं में कहा गया है कि नारद जी ब्रह्मा के मानस पुत्रों में से एक हैं। इसके साथ ही, भगवान श्रीहरि विष्णु के 24 अवतारों में से एक भी नारद जी हैं। इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु और नारद जी की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है, जिससे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। आइए, जानते हैं नारद जयंती की तिथि, मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में...
तिथि और मुहूर्त
द्रिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह की कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि 02 मई की रात 12:51 बजे से प्रारंभ होगी और 03 मई की रात 03:02 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के अनुसार, नारद जयंती 02 मई 2026 को मनाई जाएगी।
पूजन विधि
इस दिन प्रातः जल्दी स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें और सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें। इसके बाद, पूजा स्थल की सफाई करें और गंगाजल का छिड़काव करें। फिर भगवान विष्णु की पूजा करें और उन्हें फल, ताजे फूल, चंदन और कुमकुम अर्पित करें। इसके बाद विधिपूर्वक धूप-दीप के साथ भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करें। अंत में, नारद जी की पूजा करें। पूजा के दौरान श्रीहरि को पंचामृत का भोग अवश्य लगाएं, जिसमें तुलसी के पत्ते शामिल करें।
पूजा का फल
भगवान विष्णु और नारद जी की पूजा करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। जातक पर भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, नारद जयंती पर पूजा करने से बल, बुद्धि और ज्ञान की प्राप्ति होती है। इस दिन भगवान विष्णु के मंदिर जाकर बांसुरी अर्पित करना भी महत्वपूर्ण है।