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निर्जला एकादशी: जानें व्रत के महत्व और शुभ संयोग

निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून को मनाया जाएगा, जो सभी एकादशियों में सबसे महत्वपूर्ण है। इस दिन श्रद्धालु बिना जल और भोजन के व्रत रखते हैं। जानें व्रत के दौरान क्या करें यदि गलती से व्रत टूट जाए, और इस दिन के चार शुभ संयोगों के बारे में। यह व्रत भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।
 

निर्जला एकादशी का महत्व


निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून को मनाया जाएगा। इसे सभी एकादशियों में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, जो भक्त पूरे वर्ष एकादशी का व्रत नहीं कर पाते, वे इस दिन का व्रत रखकर भगवान विष्णु से पूर्ण फल प्राप्त कर सकते हैं।


एकादशी तिथि का समय

द्रिक पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 24 जून को शाम 06:12 बजे से शुरू होगी और 25 जून को शाम 08:09 बजे तक रहेगी। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना अत्यंत लाभकारी रहेगा। यह व्रत बिना किसी भोजन और जल के किया जाता है।


व्रत टूटने पर क्या करें?

यदि किसी कारणवश व्रत टूट जाए, तो श्रद्धालुओं को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। शास्त्रों के अनुसार, भगवान भाव के भूखे हैं। यदि अनजाने में पानी पी लिया गया है, तो इसे जानबूझकर की गई गलती नहीं माना जाता। ऐसे में सबसे पहले भगवान विष्णु से क्षमा मांगनी चाहिए।


निर्जला एकादशी की पौराणिक कथा

इस एकादशी को पांडव एकादशी और भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। भीमसेन, जो खाने-पीने का शौकीन था, एकादशी का व्रत नहीं रख पाता था। महर्षि व्यास ने उसे सलाह दी कि वह साल में एक बार निर्जला एकादशी का व्रत रखे।


पानी का त्याग क्यों?

निर्जला एकादशी में जल का त्याग आत्मसंयम और भगवान विष्णु के प्रति समर्पण का प्रतीक है। इस दिन व्रती सूर्योदय से लेकर द्वादशी तिथि तक जल का भी त्याग करते हैं।


प्रायश्चित के लिए दान

यदि व्रत के दौरान गलती से पानी पी लिया गया हो, तो दान करना शुभ माना जाता है। इस दिन किसी जरूरतमंद को जल से संबंधित वस्तुओं का दान करना चाहिए।


व्रत को न छोड़ें

यदि पानी पी लिया गया है, तो भी व्रत को छोड़ना उचित नहीं है। भगवान विष्णु का स्मरण करते रहें और व्रत के नियमों का पालन करें।


25 जून के शुभ संयोग

इस दिन चार शुभ संयोग बन रहे हैं। रवि योग सुबह 5:25 से शाम 4:29 बजे तक रहेगा। शिव योग सुबह 10:22 से शुरू होगा। सिद्ध योग सुबह 10:53 से प्रभावी रहेगा। यह दिन भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए विशेष है।