नृसिंह जयंती 2026: भगवान विष्णु के अवतार का पर्व
नृसिंह जयंती का महत्व
नृसिंह जयंती 2026: सनातन धर्म में भगवान विष्णु के अवतारों की कहानियाँ प्राचीन ग्रंथों में वर्णित हैं। नृसिंह जयंती, भगवान विष्णु के चौथे अवतार, भगवान नृसिंह के प्रकट होने का उत्सव है। यह पर्व वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है।
इस वर्ष, नृसिंह जयंती 30 अप्रैल, गुरुवार को मनाई जाएगी।
पौराणिक कथा और महत्व
भगवान विष्णु ने अपने भक्त प्रहलाद की रक्षा और अहंकारी असुर राजा हिरण्यकशिपु का वध करने के लिए यह अवतार लिया। हिरण्यकशिपु को ब्रह्मा जी से यह वरदान प्राप्त था कि न तो कोई मनुष्य उसे मार सकेगा, न पशु, न दिन में और न रात में, न अस्त्र से और न शस्त्र से, और न घर के भीतर और न बाहर। इसलिए भगवान विष्णु ने आधा मानव (नृ) और आधा शेर (सिंह) का रूप धारण किया और संध्या के समय अपने नाखूनों से उसका वध किया।
मुख्य परंपराएं
व्रत और उपवास: श्रद्धालु इस दिन सूर्योदय से लेकर अगले दिन सूर्योदय तक उपवास रखते हैं।
संध्या पूजा: चूंकि भगवान नृसिंह का प्रकट होना सूर्यास्त के समय हुआ था, इसलिए मुख्य पूजा शाम को की जाती है।
अभिषेक: मंदिरों में भगवान की प्रतिमा का दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक किया जाता है।
दान-पुण्य और पूजन विधि
दान-पुण्य: इस दिन तिल, सोना और वस्त्र दान करने का विशेष महत्व है।
पूजन विधि:
संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें।
स्थापना: दोपहर में भगवान नृसिंह और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें।
भोग और मंत्र जप
भोग: भगवान को फल, पुष्प, कुमकुम और केसर अर्पित करें। विशेष रूप से चने की दाल और गुड़ का भोग लगाया जाता है।
मंत्र जप: भगवान नृसिंह के क्रोध को शांत करने और कृपा पाने के लिए उनके मंत्रों का जाप करें:
उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्।
नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम्॥
संदेश
नृसिंह जयंती हमें यह सिखाती है कि ईश्वर हर जगह मौजूद हैं और अपने भक्तों की सहायता के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं। यह अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है।