पितृ पक्ष की शुरुआत: भाद्रपद पूर्णिमा का महत्व और ऋषि तर्पण की विधि
पितृ पक्ष का आरंभ
आज, 26 सितंबर 2026 को भाद्रपद पूर्णिमा से पितृ पक्ष की शुरुआत हो चुकी है, जो आश्विन कृष्ण अमावस्या तक चलेगा। धार्मिक ग्रंथों में इन 16 दिनों का विशेष महत्व बताया गया है। पितृ पक्ष के दौरान हर दिन का अपना अलग महत्व होता है। स्कंद पुराण और गरुड़ पुराण में उल्लेख है कि इस समय हमारे पूर्वजों, जैसे दादा, दादी, माता और पिता, जिनका निधन हो चुका है, उनके नाम से विशेष पूजा और अन्न जल का दान करना चाहिए।
भाद्रपद पूर्णिमा का महत्व
भाद्रपद पूर्णिमा का दिन विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस दिन उन लोगों को तर्पण और पिंड अर्पित किया जाता है, जिनकी मृत्यु पूर्णिमा तिथि पर हुई थी। इस दिन ऋषि तर्पण का आयोजन किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, अगस्त मुनि का तर्पण उनकी पत्नी लोपामुद्रा के साथ विशेष रूप से किया जाता है। इसके अलावा, वशिष्ठ, जमदग्नि, कश्यप, भरद्वाज, विश्वास और गौतम ऋषि के नाम से भी जल तर्पण किया जाता है।
ऋषि तर्पण की कथा
पितृ पक्ष के पहले दिन ऋषि तर्पण का आयोजन क्यों किया जाता है, इसके पीछे एक प्रचलित कथा है। कथा के अनुसार, दो असुर भाई आतापी और वातापी ने ऋषियों को मारने का प्रयास किया। आतापी के पास एक दिव्य शक्ति थी, जिससे वह मृत व्यक्ति को पुनर्जीवित कर सकता था, जबकि वातापी रूप बदल सकता था। दोनों भाई दिन में समुद्र में छिपते थे और रात में ऋषियों को भोजन पर आमंत्रित करते थे।
अगस्त मुनि का योगदान
अगस्त मुनि ने इन असुरों का अंत करने के लिए देवताओं की सहायता की। उन्होंने समुद्र का जल पीकर असुरों को समाप्त किया। इस दिन को भाद्रमास की पूर्णिमा के रूप में जाना जाता है। देवताओं ने कहा कि अब से पितृ पक्ष के पहले दिन अगस्त मुनि का तर्पण उनकी पत्नी लोपामुद्रा के साथ करना होगा।
ऋषि तर्पण की विधि
इस दिन सबसे पहले पंडित से तर्पण करवाना चाहिए। यदि आप स्वयं करना चाहते हैं, तो फल, खीरा, तिल, जौ, अक्षत, सफेद फूल और कुश सामग्री की आवश्यकता होगी। तर्पण के लिए पीतल के लोटे का उपयोग करें और दक्षिण की ओर मुंह करके जल अर्पित करें। तर्पण के समय गीले वस्त्र पहनना आवश्यक है।
ऋषि तर्पण मंत्र
ओम आगच्छ मुनि शार्दूल तेजोरास जगतपते। उदयन्ते लंका द्वारे अर्धोऽयं प्रति गृह्यताम् ॥
इस मंत्र से जल लेकर भूमि पर छोड़ें।
ओम कुम्भयोनि समुत्पन्न मुनीनां मुनिसत्तम्। उदयन्ते लंका द्वारे अर्थोऽयं प्रति गृह्यताम् ॥
अब फल फूल अक्षत तिल शंख में लेकर जल दें।
ओम शंखं पुष्पं फलन्तोयं रत्नानि विविधानि च।
इस मंत्र से ऋषियों से प्रार्थना करें।