पुत्रदा एकादशी: संतान सुख के लिए विशेष मंत्रों का जाप
पुत्रदा एकादशी का महत्व
पुत्रदा एकादशी के दिन भगवान श्रीहरि विष्णु और उनके बाल रूप श्री कृष्ण की पूजा का महत्व है। वर्ष 2026 में यह व्रत रविवार, 23 अगस्त को मनाया जाएगा। यदि संतान प्राप्ति में कोई बाधा आ रही हो या संतान की उन्नति की कामना हो, तो पति-पत्नी को इस दिन एक साथ व्रत रखकर विशेष वैदिक मंत्रों का जाप करना चाहिए।
मंत्र जाप का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सच्चे मन से किया गया मंत्र जाप जीवन के कष्टों को दूर करता है। पति-पत्नी द्वारा एक साथ पूजा करने से घर में सुख-शांति आती है।
संतान गोपाल सिद्ध मंत्र का जाप
संतान की रक्षा और प्राप्ति के लिए संतान गोपाल सिद्ध मंत्र का जाप अत्यंत लाभकारी माना जाता है। यह मंत्र है: ॐ देवकीसुत गोविंद वासुदेव जगत्पते। देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गत:॥ इस दिन भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति के सामने घी का दीपक जलाकर तुलसी की माला से इस मंत्र का जाप करना चाहिए।
ध्यान मंत्र का महत्व
श्री कृष्ण बाल रूप ध्यान मंत्र
भगवान श्री कृष्ण के बाल रूप का ध्यान करते हुए विशेष ध्यान मंत्र का जाप किया जाता है: ॐ क्लीं देवकीसुत गोविंद वासुदेव जगत्पते देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गत: क्लीं ॐ॥ इस मंत्र का जाप मानसिक शुद्धता और ईश्वर के प्रति निष्ठा बढ़ाता है।
गोपाल सहस्रनाम पाठ
गोपाल सहस्रनाम पाठ और भोग का नियम
इस दिन गोपाल सहस्रनाम का पाठ करना भी अत्यंत फलदायी माना जाता है। पूजा के अंत में माखन-मिश्री और तुलसी दल का भोग लगाकर प्रसाद वितरित करना चाहिए।
इस प्रकार श्रद्धा से किया गया पूजन और दान व्यक्ति के जीवन से सभी बाधाओं को दूर कर देता है।
पुत्रदा एकादशी 2026 की तिथि
कब है सावन पुत्रदा एकादशी 2026?
पंचांग के अनुसार, सावन पुत्रदा एकादशी तिथि 23 अगस्त को रात 2:00 बजे से शुरू होगी और 24 अगस्त को सुबह 4:18 बजे समाप्त होगी।
पुत्रदा एकादशी शुभ मुहूर्त
इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 7:32 बजे से दोपहर 12:24 बजे तक रहेगा।
पूजा विधि और फल
पूजा विधि और महत्व
इस दिन स्नान करके भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा की जाती है।
पुत्रदा एकादशी करने से क्या फल मिलता है?
- संतान सुख: योग्य संतान की प्राप्ति होती है।
- पाप नाश: पुराने पाप नष्ट होते हैं।
- मोक्ष प्राप्ति: मृत्यु के बाद भगवान के धाम की प्राप्ति होती है।
- सुख-समृद्धि: घर में शांति और लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।