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पुरुषोत्तम मास 2026: धार्मिक महत्व और पालन करने के नियम

पुरुषोत्तम मास 2026 का आगमन हो चुका है, जो हिंदू धर्म में विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व रखता है। इस महीने में भगवान विष्णु की पूजा, सात्विक जीवनशैली का पालन और तीर्थ स्नान का महत्व बताया गया है। जानें इस महीने के नियम और कैसे आप अपने जीवन में इसे शामिल कर सकते हैं।
 

पुरुषोत्तम मास का महत्व

पुरुषोत्तम मास 2026: हिंदू धर्म में अधिक मास का एक विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। वैदिक पंचांग चंद्रमा की गति पर आधारित होता है, जबकि मौसम और वर्ष सूर्य की गति से चलते हैं। हर वर्ष इन दोनों में लगभग 11 दिनों का अंतर उत्पन्न होता है। यह अंतर धीरे-धीरे बढ़ता है और लगभग 3 वर्षों में यह अंतर 30 दिनों का हो जाता है। इस अतिरिक्त समय को संतुलित करने के लिए एक पूरा महीना जोड़ा जाता है, जिसे पुरुषोत्तम मास या अधिक मास कहा जाता है।


यह महीना भगवान विष्णु को समर्पित होता है और इस दौरान की गई पूजा, दान और साधना का फल कई गुना बढ़ जाता है। हालांकि, इस महीने के कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक है।


भगवान विष्णु की पूजा

भगवान विष्णु की करें पूजा
इस महीने में प्रतिदिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करना चाहिए। ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।


सात्विक जीवनशैली का पालन

सात्विक जीवनशैली
इस दौरान तामसिक भोजन से बचना चाहिए और सात्विक भोजन का सेवन करना चाहिए। संयम और ब्रह्मचर्य का पालन भी लाभकारी होता है।


तीर्थ स्नान और पूजा का महत्व

तीर्थ स्नान और पूजा
नदियों में स्नान, व्रत और विशेष पूजा-अर्चना करने से आत्मिक शुद्धि होती है और पापों का नाश होता है।