फाल्गुन पूर्णिमा: तिथि, पूजा विधि और महत्व
फाल्गुन पूर्णिमा का व्रत हिंदू धर्म में महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन भक्तजन चंद्र देवता की पूजा करते हैं। 2026 में, यह तिथि 02 और 03 मार्च को आएगी, जिसमें चंद्र ग्रहण भी होगा। जानें इस दिन की पूजा विधि, सही तिथि और इसके महत्व के बारे में।
Mar 2, 2026, 14:49 IST
फाल्गुन पूर्णिमा का महत्व
हिंदू धर्म में फाल्गुन पूर्णिमा का विशेष स्थान है। इस दिन भक्तजन पूर्णिमा का व्रत रखते हैं और चंद्र देवता की पूजा करते हैं। वर्ष 2026 में, पूर्णिमा तिथि दो अलग-अलग दिनों में आएगी, और 03 मार्च 2026 को चंद्र ग्रहण भी होगा। इस कारण से भक्तों में यह संदेह है कि फाल्गुन पूर्णिमा का व्रत 02 मार्च को मनाया जाएगा या 03 मार्च को। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, आइए जानते हैं फाल्गुन पूर्णिमा की सही तिथि, मुहूर्त, पूजा विधि और इसके महत्व के बारे में...
तिथि और मुहूर्त
वैदिक पंचांग के अनुसार, 02 मार्च 2026 की शाम 05:56 बजे से पूर्णिमा तिथि की शुरुआत होगी। इसके बाद, 03 मार्च 2026 को शाम 05:08 बजे पूर्णिमा तिथि समाप्त होगी। इस दिन चंद्र ग्रहण भी होगा, जिससे सूतक काल प्रभावी रहेगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पूर्णिमा व्रत उसी दिन किया जाता है जब चंद्रोदय के समय पूर्णिमा तिथि हो। इसलिए, 02 मार्च 2026 को फाल्गुन पूर्णिमा का व्रत किया जाएगा।
पूजा विधि
इस दिन सुबह जल्दी स्नान करें, और यदि संभव हो तो किसी पवित्र नदी में स्नान करें। अन्यथा, नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। फिर सूर्य देव को जल अर्पित करें और व्रत का संकल्प लें। पूजा स्थान पर एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान श्रीहरि विष्णु और मां लक्ष्मी की मूर्ति स्थापित करें। इसके बाद, भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी को तिलक, पुष्प, फल और वस्त्र अर्पित करें।
इसके बाद, भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करते हुए भोग अर्पित करें। फिर पूर्णिमा कथा का पाठ करें और चंद्रोदय के समय चंद्रमा को जल में कच्चा दूध मिलाकर अर्घ्य दें। अंत में आरती करें और पूजा में हुई भूल के लिए क्षमा मांगें। प्रसाद ग्रहण करके व्रत का पारण करें और अगले दिन दान-पुण्य करें।
महत्व
फाल्गुन पूर्णिमा का व्रत अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। इस दिन व्रत और पूजा करने से भक्त को भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, फाल्गुन पूर्णिमा का व्रत करने से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है और धन-धान्य की प्राप्ति होती है। इसके अलावा, जिनकी कुंडली में चंद्र दोष होता है, उन्हें यह व्रत मानसिक शांति प्रदान करता है। पूर्णिमा व्रत में स्नान, दान और जप-तप का विशेष महत्व है।