बासी आटे से बनी रोटियों के नुकसान: जानें क्यों ताजा आटा जरूरी है
बासी आटे से बनी रोटियां और राहु का प्रभाव
बासी आटे से बनी रोटियों का सेवन और इसके दुष्प्रभाव
रसोई घर को सनातन धर्म और वास्तु शास्त्र में पवित्र स्थान माना जाता है। इसे माता अन्नपूर्णा का निवास स्थान माना जाता है, जो घर में समृद्धि और शांति का आशीर्वाद देती हैं। इसलिए, रसोई में भोजन को पूरी शुद्धता के साथ बनाना आवश्यक है। कई बार महिलाएं रात को गुंथे आटे से रोटियां बना देती हैं, लेकिन सुबह तक वह आटा बासी हो जाता है और उसमें हल्का खमीर भी आ जाता है।
अधिकतर लोग सुबह जल्दी उठने की वजह से बासी आटे की रोटियां खा लेते हैं, लेकिन शास्त्रों के अनुसार, ऐसा करना उचित नहीं है। बासी आटे की रोटियों का सेवन करने से नकारात्मक ऊर्जा, आलस्य, चिड़चिड़ापन और क्रोध बढ़ता है।
मां अन्नपूर्णा की नाराजगी
रसोई में बासी रोटियों का बनाना मां अन्नपूर्णा को नाराज कर सकता है, जिससे रसोई की सकारात्मकता कम हो जाती है। ज्योतिष के अनुसार, रोटियों का संबंध सूर्य और मंगल ग्रह से होता है। ताजा रोटियां शरीर को ऊर्जा और शक्ति प्रदान करती हैं, जबकि मंगल ग्रह उत्साह और साहस का प्रतीक है।
राहु का प्रभाव और बासी आटा
ज्योतिष में बासी आटे का संबंध राहु से जोड़ा गया है, जो भ्रम और मानसिक उलझन का कारक ग्रह है। जब लोग बासी आटे की रोटियां खाते हैं, तो राहु का प्रभाव बढ़ता है, जिससे तनाव और आपसी विवाद उत्पन्न होते हैं।
धर्मसिंधु और अन्य ग्रंथों में कहा गया है कि रात को रखा हुआ भोजन या आटा सुबह तक बासी माना जाता है, इसलिए इसका सेवन नहीं करना चाहिए।