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बुढ़वा मंगल: गर्मी में हनुमान की पूजा का महत्व

बुढ़वा मंगल, जो हर साल ज्येष्ठ माह में आता है, भगवान हनुमान को समर्पित है। इस पर्व का आयोजन गर्मी में होता है, जो न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक सेवा का भी संदेश देता है। जानें इस पर्व के पीछे की मान्यताएँ और इसके महत्व के बारे में।
 

भगवान हनुमान को समर्पित बुढ़वा मंगल


ज्येष्ठ माह की तपती गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच हर साल बुढ़वा मंगल का पर्व मनाया जाता है। 2026 में, यह पर्व 5 मई को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया।


हिंदू धर्म में ज्येष्ठ माह के मंगलवार को बड़ा मंगल कहा जाता है, जो भगवान हनुमान को समर्पित है। इस दिन सच्चे मन से पूजा करने से सभी संकट दूर होने और जीवन में सुख-समृद्धि आने की मान्यता है।


इस बार 8 बड़े मंगल

इस वर्ष ज्येष्ठ माह 2 मई से शुरू होकर 29 जून तक चलेगा। खास बात यह है कि 17 मई से 15 जून तक अधिक मास भी है, जिससे इस बार कुल 8 बड़े मंगल का दुर्लभ संयोग बन रहा है।


गर्मी और बड़े मंगल का संबंध

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ माह को वर्ष का सबसे गर्म समय माना जाता है। इस दौरान सूर्य देव की प्रचंडता अपने चरम पर होती है। हनुमान जी की पूजा का महत्व इसलिए है क्योंकि उन्हें शक्ति और संकटमोचन का प्रतीक माना जाता है। जब प्रकृति कठिन होती है, तब ईश्वर की भक्ति से मानसिक और आध्यात्मिक शक्ति मिलती है।


आसमान से बरसती आग और सेवा का संकल्प

बड़े मंगल का आयोजन एक सामाजिक और आध्यात्मिक संदेश भी देता है। जब गर्मी से प्यास लगती है, तब जगह-जगह प्याऊ और भंडारों का आयोजन करना मानवता की सेवा है। गुड़-धनिया और ठंडे शरबत का वितरण यह सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में दूसरों की मदद कैसे की जाती है।


क्यों ज्येष्ठ मास में मनाते हैं बड़ा मंगल?

ज्येष्ठ माह और मंगलवार का संबंध हनुमान जी के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं से जुड़ा है। मान्यता है कि त्रेतायुग में इसी दिन हनुमान जी की पहली मुलाकात भगवान श्री राम से हुई थी। एक अन्य कथा के अनुसार, इसी दिन हनुमान जी ने वृद्ध वानर का रूप धारण कर भीम का घमंड तोड़ा था, जिससे इसे बुढ़वा मंगल कहा जाता है।