भगवान जगन्नाथ को खिचड़ी का भोग: एक अनोखी परंपरा
भगवान जगन्नाथ को खिचड़ी का भोग क्यों अर्पित किया जाता है?
भगवान जगन्नाथ को भोग अर्पित करने की परंपरा में विभिन्न प्रकार के भोग शामिल होते हैं। जैसे भगवान गणेश को मोतीचूर के लड्डू पसंद हैं, वहीं माता लक्ष्मी को खीर अर्पित की जाती है। लेकिन भगवान जगन्नाथ की पसंद कुछ अलग है। उन्हें साधारण बाजरे की खिचड़ी अति प्रिय है, जो भक्तों के प्रेम और भक्ति का प्रतीक है।
भगवान जगन्नाथ और खिचड़ी का महत्व
भगवान जगन्नाथ को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है, और उनका निवास ओडिशा के पुरी में है, जो हिंदू धर्म के चार प्रमुख धामों में से एक है। हर साल आषाढ़ मास की द्वितीया तिथि को भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ भव्य रथ यात्रा पर निकलते हैं। इस अवसर पर लाखों श्रद्धालु भगवान के दर्शन के लिए पुरी आते हैं।
भगवान को अर्पित किए जाने वाले 56 प्रकार के भोग में बाजरे की खिचड़ी का विशेष स्थान है। मान्यता है कि सबसे पहले इसी खिचड़ी का भोग भगवान को अर्पित किया जाता है, जो दर्शाता है कि सच्चे प्रेम का महत्व विधि-विधान से कहीं अधिक है।
करमाबाई की भक्ति की कहानी
प्राचीन कथा के अनुसार, करमाबाई भगवान कृष्ण की एक अनन्य भक्त थीं। उन्होंने भगवान को अपने पुत्र के समान मानते हुए साधारण बाजरे की खिचड़ी बनाई और अर्पित की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान जगन्नाथ ने उन्हें दर्शन दिए और कहा कि वह प्रतिदिन उनके लिए यही खिचड़ी बनाएंगी।
एक संत ने करमाबाई को बताया कि भोग लगाने से पहले शुद्धता का ध्यान रखना चाहिए। करमाबाई ने संत की बात मानी, लेकिन भगवान ने देखा कि वह अपनी सरल भक्ति को छोड़ रही हैं। भगवान ने संत को स्वप्न में बताया कि सच्चा प्रेम और भक्ति ही सबसे बड़ा नियम है।
करमाबाई की अंतिम विदाई
समय के साथ करमाबाई ने पुरी धाम में अपना शरीर त्याग दिया। मान्यता है कि उनके निधन के दिन भगवान जगन्नाथ की आंखों में आंसू थे। भगवान ने पुजारी को स्वप्न में बताया कि करमाबाई अब इस संसार में नहीं हैं और पूछा, "अब मुझे कौन खिलाएगा?" इस घटना के बाद से भगवान जगन्नाथ को प्रतिदिन सुबह सबसे पहले बाजरे की खिचड़ी का भोग अर्पित करने की परंपरा शुरू हुई।