भगवान परशुराम जयंती 2026: महत्व और पूजा विधि
भगवान परशुराम जयंती 2026
भगवान परशुराम की जयंती: सनातन धर्म में भगवान परशुराम की जयंती हर साल अक्षय तृतीया के दिन मनाई जाती है। परशुराम जी, जो शस्त्र और शास्त्र के महान ज्ञाता हैं, का प्रकटोत्सव त्रेता युग में वैशाख शुक्ल तृतीया को हुआ था। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन परशुराम जी की पूजा, दान और उपवास करना शुभ फलदायी माना जाता है। यह जयंती भगवान परशुराम के साहस और न्याय का प्रतीक है।
परशुराम जयंती 2026 का मुहूर्त:
वैशाख शुक्ल तृतीया तिथि प्रारंभ - 19 अप्रैल 2026, सुबह 10:49
वैशाख शुक्ल तृतीया तिथि समाप्त - 20 अप्रैल 2026, सुबह 07:27
पूजा का मुहूर्त - सुबह 7:29 से दोपहर 12:20 तक
शाम की पूजा का मुहूर्त - सुबह 6:49 से सुबह 10:57 तक
परशुराम जी के माता-पिता ऋषि जमदग्नि और माता रेणुका थे। संतान प्राप्ति के लिए उन्होंने कठोर तप और विशेष यज्ञ किया। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर इंद्र देव ने उन्हें तेजस्वी पुत्र का आशीर्वाद दिया, जिसके फलस्वरूप अक्षय तृतीया के दिन उनका जन्म हुआ। जन्म के समय उनका नाम 'राम' रखा गया। परशुराम की प्रारंभिक शिक्षा उनके दादा ऋचिक और पिता जमदग्नि से हुई।
पूजा विधि: सुबह स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें। परशुराम जी की प्रतिमा या चित्र की स्थापना करें। चंदन, फूल, धूप, दीप और तुलसी अर्पित करें। फल या मिठाई का भोग लगाएं।
दान-पुण्य: इस दिन अनाज, कपड़े और अन्य वस्तुओं का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।