भगवान परशुराम जयंती: जानें उनके अवतार की पौराणिक कथा
भगवान परशुराम जयंती का महत्व
हर वर्ष वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जाता है, जो भगवान परशुराम की जयंती के रूप में भी जाना जाता है। परशुराम, भगवान विष्णु के छठे अवतार माने जाते हैं। मान्यता है कि इसी दिन भगवान ने धरती पर अवतार लिया था।
इस साल, परशुराम जयंती 19 अप्रैल को मनाई जाएगी। जबकि यह सभी को ज्ञात है कि भगवान परशुराम ने कई बार क्षत्रियों का संहार किया, लेकिन बहुत से लोग इस बात से अनजान हैं कि भगवान विष्णु ने परशुराम के रूप में अवतार क्यों लिया। आइए जानते हैं इसके पीछे की कहानी।
पौराणिक कथा का सार
परशुराम का अवतार एक महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है। प्राचीन काल में महिष्मती नामक नगर में सहस्त्रबाहु नामक एक अत्याचारी राजा शासन करता था। राजा की क्रूरता के कारण प्रजा अत्यधिक दुखी थी। इस स्थिति को देखकर माता पृथ्वी भगवान विष्णु के पास गईं।
भगवान विष्णु ने माता पृथ्वी को आश्वासन दिया कि राजा सहस्त्रबाहु के अत्याचारों का अंत होगा। उन्होंने कहा कि जब अधर्म का प्रकोप बढ़ता है, तब वे धर्म की रक्षा के लिए अवतार लेते हैं। भगवान ने माता से कहा कि वे महर्षि जमदग्नि के पुत्र के रूप में जन्म लेंगे और सहस्त्रबाहु का वध करेंगे।
परशुराम का सहस्त्रबाहु का वध
कुछ समय बाद, भगवान विष्णु ने वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को परशुराम के रूप में अवतार लिया। इसके बाद, उन्होंने राजा सहस्त्रबाहु का वध किया और नगरवासियों को उसके आतंक से मुक्त किया। परशुराम के अवतार का वर्णन विष्णु पुराण में विस्तार से मिलता है।