भगवान शंकर की कथा: सगुण और निर्गुण का रहस्य
इस लेख में भगवान शंकर की कथा के माध्यम से सगुण और निर्गुण के रहस्य को समझाया गया है। देवी पार्वती द्वारा श्रवण की गई इस कथा में भक्त के प्रेम की शक्ति को दर्शाया गया है, जो ईश्वर को सगुण रूप में प्रकट करता है। जानें कैसे प्रेम और श्रद्धा से ईश्वर की अनुभूति संभव है।
Aug 28, 2025, 11:52 IST
भगवान शंकर की कथा का श्रवण
देवी पार्वती भगवान शंकर द्वारा प्रवाहित श्रीरामकथा को गहरी श्रद्धा और ध्यान के साथ सुन रही हैं। यह प्रश्न कि ईश्वर सगुण है या निर्गुण, महान मुनियों और तपस्वियों को भी भ्रमित कर देता है। इस संसार में कोई भी व्यक्ति केवल सांसारिक ज्ञान के आधार पर इस गहन सत्य को पूरी तरह नहीं समझ सकता, क्योंकि ईश्वर की विशालता इतनी अनंत है कि वह मानव की सीमित बुद्धि से बहुत दूर है, जैसे आकाश के तारे पृथ्वी से।
ईश्वर की लीला का रहस्य
क्या यह मान लेना चाहिए कि भगवान की लीला का रहस्य कभी भी प्रकट नहीं हो सकता? नहीं, ऐसा नहीं है। प्रभु की अनुभूति असंभव नहीं है; बस एक ऐसे संत की आवश्यकता होती है, जो भगवान शंकर की तरह परमयोगी, त्यागमूर्ति और तत्त्वदर्शी हो। वास्तव में, ऐसा संत साक्षात महादेव का स्वरूप होता है, जो निराकार ब्रह्म का साकार रूप बनकर प्रकट होता है।
सगुण और निर्गुण का महत्व
हमने पिछले अंक में सगुण और निर्गुण स्वरूप पर चर्चा की थी, जैसा कि भगवान शंकर ने कहा है—
“सगुनिह अगुनिह नहिं कछु भेदा।
गावहिं मुनि पुरान बुध बेदा।।
अगुन अरूप अलख अज जोई।
भगत प्रेम बस सगुन सो होई।।’’
अर्थात, परमात्मा भले ही कण-कण में व्याप्त, अजन्मा और निराकार है; लेकिन भक्त के प्रेम के कारण वही ईश्वर सगुण रूप में प्रकट होते हैं।
भक्तों का प्रेम
हालांकि वह ईश्वर सम्पूर्ण जगत का कर्ता है, फिर भी सगुण रूप में अवतरित होकर भक्तों के बीच सुख-दुःख का अनुभव करते हैं। यह तभी संभव है जब भक्त अपार श्रद्धा और प्रेम से उन्हें पुकारे। यही कारण है कि भगवान श्रीकृष्ण ने दुर्योधन के आमंत्रण को ठुकराकर विदुरानी के घर सादगी से पहुंचे।
प्रह्लाद का उदाहरण भी इसी सत्य को दर्शाता है। नरसिंहावतार की कोई पूर्व-कल्पना नहीं थी, लेकिन भक्त प्रह्लाद के अटूट प्रेम ने प्रभु को प्रकट होने के लिए बाध्य कर दिया।
प्रेम की शक्ति
प्रेम ही वह अदृश्य सूत्र है, जो ईश्वर को भी बांध लेता है। जैसे सुगंध का स्वरूप निर्गुण है, लेकिन वह पुष्प के रूप में ही अनुभव किया जा सकता है। इसी तरह, ईश्वर भी भक्त की पुकार सुनकर अपने निर्गुण रूप को त्यागकर सगुण रूप में प्रकट होते हैं।
धन्ना जाट की कथा इस सत्य की पुष्टि करती है। जब धन्ना ने निष्कलुष प्रेम से प्रभु को बुलाया, तो परमात्मा स्वयं खेत जोतने आए। यह प्रेम की शक्ति है, जो सर्वशक्तिमान प्रभु को भी अपने पाश में बांध लेती है।
समापन
(---क्रमशः)
- सुखी भारती