×

मंगला गौरी व्रत: सावन में सुहागिनों के लिए विशेष पूजा विधि

मंगला गौरी व्रत सावन के महीने में हर मंगलवार को मनाया जाता है, जिसमें विवाहित महिलाएं माता गौरी की पूजा करती हैं। इस व्रत का उद्देश्य पति की दीर्घायु की कामना करना है। इस वर्ष, तीसरा मंगला गौरी व्रत 18 अगस्त को है। पूजा के दौरान सोलह श्रृंगार का विशेष महत्व है, और इसे विधिपूर्वक करने से अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। जानें इस व्रत की पूजा विधि, लाभ और क्या खाएं, क्या न खाएं।
 

पति की दीर्घायु के लिए पूजा कैसे करें?


सावन के महीने में हर मंगलवार को मंगला गौरी व्रत मनाया जाता है। इस अवसर पर विवाहित महिलाएं माता गौरी की पूजा करती हैं और अपने पति की दीर्घायु की कामना करती हैं। इस वर्ष सावन में चार मंगला गौरी व्रत होंगे, जिनमें से तीसरा व्रत 18 अगस्त को है। यह व्रत अखंड सौभाग्य और दांपत्य जीवन में सुख-शांति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।


इस व्रत के पीछे मान्यता है कि माता गौरी ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था। इसलिए, कुंवारी लड़कियां इस दिन माता गौरी की पूजा करती हैं ताकि उन्हें अच्छा जीवनसाथी मिले।


सावन के तीसरे मंगला गौरी पर 16 श्रृंगार का महत्व

मंगला गौरी व्रत के दिन महिलाओं को सोलह श्रृंगार करके पूजा करनी चाहिए। इस दिन माता गौरी को भी श्रृंगार की सामग्रियां अर्पित की जानी चाहिए। इससे सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है।


माता गौरी को 16 श्रृंगार में चुनरी, चूड़ियां, बिंदी, सिंदूर, मेहंदी आदि अर्पित करें और पति की दीर्घायु की प्रार्थना करें। इस दिन सभी चीजें 16 की संख्या में चढ़ाना शुभ माना जाता है, जैसे 16 फल, 16 फूल और 16 मिठाइयां।


मंगला गौरी व्रत के दिन पूजा कैसे करें


  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें।

  • पूजा स्थल की सफाई करें और एक चौकी पर लाल या पीले कपड़े बिछाएं।

  • पूजा आरंभ करने से पहले व्रत का संकल्प लें।

  • सोलह श्रृंगार करके पूजा शुरू करें।

  • माता गौरी को फूल, फल और श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें।

  • पूजन के दौरान मंगला गौरी व्रत की कथा का पाठ करें और आरती करें।

  • आरती के बाद नैवेद्य को परिवार में बांट दें।

  • यदि उपवास कर रहे हैं, तो फलाहार करें।


मंगला गौरी व्रत के फायदे

सावन में मंगला गौरी व्रत करने से कई लाभ होते हैं। इस व्रत से महिलाओं को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। यदि संतान प्राप्ति की इच्छा से यह व्रत किया जाए, तो जल्दी संतान प्राप्ति के योग बनते हैं। यह व्रत कुंवारी लड़कियों के लिए भी फलदायी है, क्योंकि इससे उन्हें अच्छे जीवनसाथी का आशीर्वाद मिलता है।


मांगलिक दोष से मुक्ति दिलाता है मंगला गौरी व्रत

मंगला गौरी व्रत कुंडली में मौजूद मांगलिक दोष से मुक्ति दिलाता है और वैवाहिक जीवन में आने वाली समस्याओं को दूर करता है। सावन के तीसरे मंगला गौरी व्रत के दिन सोलह श्रृंगार करके पूजा करने की सलाह दी जाती है।


मंगला गौरी व्रत में क्या खाएं?

मंगला गौरी व्रत के दौरान सात्विक भोजन करना चाहिए।



  • इस दिन पूजा के बाद सेब, केला और पपीता जैसे फलों का सेवन किया जा सकता है।

  • दूध, दही और छाछ भी ग्रहण कर सकते हैं।

  • साबूदाने की खिचड़ी या खीर का सेवन करें।

  • कुट्टू या सिंघाड़े की पूड़ी या पराठा बनाकर खा सकते हैं।

  • भोजन में सेंधा नमक का प्रयोग करें।


मंगला गौरी व्रत में क्या न खाएं

व्रत के दौरान कुछ चीजें खाने से व्रत खंडित हो सकता है।



  • गेहूं और चावल का त्याग करें।

  • तामसिक भोजन से दूर रहें।

  • सफेद नमक का प्रयोग न करें।

  • मांस, मछली, अंडे और शराब से दूर रहें।


मंगला गौरी व्रत में क्या न करें?

व्रत के दौरान किसी से क्रोध या वाद-विवाद न करें। इससे व्रत का फल प्राप्त नहीं होगा। घर के बड़े-बुजुर्ग का अपमान न करें।


क्या कुंवारी कन्याएं रख सकती हैं व्रत?

कुंवारी कन्याएं भी मंगला गौरी व्रत कर सकती हैं। इस व्रत को विधिपूर्वक करने से विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और वैवाहिक जीवन में खुशियों का संचार होता है।