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माँ बगलामुखी जयंती 2026: देवी की महिमा और पूजा का महत्व

माँ बगलामुखी की जयंती 2026 में 24 अप्रैल को मनाई जाएगी। यह देवी शक्ति साधना और शत्रु-विनाश के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। जानें उनके अवतरण की पौराणिक कथा और पीतांबरा पीठ का महत्व। देवी का पीला रंग और उसकी साधना में उपयोग का विशेष महत्व है।
 

माँ बगलामुखी का अवतरण दिवस

बगलामुखी जयंती 2026: माँ बगलामुखी, जिन्हें बांग्लामुखी भी कहा जाता है, दस महाविद्याओं में से एक प्रमुख देवी मानी जाती हैं। यह देवी वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को प्रकट हुई थीं। इस वर्ष, माँ की जयंती 24 अप्रैल को मनाई जाएगी। देवी बगलामुखी को शक्ति साधना और शत्रुओं के विनाश के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। उन्हें पीतांबरा के नाम से भी जाना जाता है, जो नकारात्मकता और वाक्शक्ति को नियंत्रित करती हैं।


पौराणिक कथा

पौराणिक कथा:
एक समय, जब पूरे ब्रह्मांड में भयंकर तूफान और प्रलय जैसी स्थिति उत्पन्न हुई, तब सभी देवता भगवान विष्णु के पास गए और उनसे इस संकट से मुक्ति की प्रार्थना की। भगवान विष्णु की तपस्या से माँ बगलामुखी का प्राकट्य हुआ। देवी का रूप पीले रंग में था, इसलिए उन्हें पीताम्बरा देवी भी कहा जाता है। माँ की साधना में पीले रंग का विशेष महत्व है।


पीतांबरा पीठ

पीतांबरा पीठ:
दतिया में स्थित माँ पीतांबरा पीठ पर भक्त बगलामुखी देवी की आराधना करते हैं। यहाँ राजसत्ता की कामना रखने वाले भक्त गुप्त पूजा अर्चना करते हैं। माँ पीतांबरा शत्रु नाश की देवी होने के साथ-साथ राजसत्ता की देवी भी मानी जाती हैं। ज्योतिषीय दृष्टि से पीले रंग का विशेष महत्व है, जो बृहस्पति ग्रह से जुड़ा है, जिसे ज्ञान, वाणी और बुद्धि का कारक माना जाता है।