मां कूष्मांडा की पूजा विधि: जानें शुभ मुहूर्त और आरती का समय
चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा
चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा
22 मार्च 2026 को चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप मां कूष्मांडा को समर्पित है। इन्हें ब्रह्मांड की रचना करने वाली देवी माना जाता है। मां का यह स्वरूप सूर्य मंडल में निवास करने की क्षमता रखता है, जो हमारे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
यदि आप लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं या मानसिक अशांति का सामना कर रहे हैं, तो मां कूष्मांडा की पूजा से आयु, यश और बल में वृद्धि होती है। यह दिन जीवन के सही संचालन और बड़ी इच्छाओं को पूरा करने के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
मां कूष्मांडा की पूजा का शुभ समय
चैत्र नवरात्रि की चतुर्थी तिथि पर मां कूष्मांडा की पूजा के लिए सुबह का समय सबसे उपयुक्त है। 22 मार्च 2026 को पूजा के लिए अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:04 से 12:53 तक रहेगा। इस समय की गई पूजा घर में सुख और समृद्धि लाती है।
सही समय पर मां का ध्यान करने से बुद्धि का विकास होता है और भविष्य की चिंताओं से मुक्ति की संभावना बढ़ती है। इस पावन समय में की गई साधना न केवल शारीरिक रोगों को दूर करती है, बल्कि परिवार में प्रेम और सामंजस्य भी बढ़ाती है।
मां कूष्मांडा की सरल पूजन विधि
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पीले या नारंगी रंग के वस्त्र पहनें, जो ऊर्जा के प्रतीक हैं।
- मां की प्रतिमा के सामने घी का अखंड दीपक जलाएं और भगवान का आभार व्यक्त करें।
- मां को लाल फूल और हरी इलायची अर्पित करें, क्योंकि उन्हें सुगंधित चीजें पसंद हैं।
- भोग के रूप में मां को मालपुआ या दही-हलवे का अर्पण करें, जिससे घर में सुख-समृद्धि बनी रहे।
- यदि संभव हो तो मां को कुम्हड़ा भेंट करें, जिससे आपके जीवन के कष्ट दूर होते हैं।
- पूजन के दौरान मां के मंत्रों का जाप करें और अंत में श्रद्धा से क्षमा मांगें।
मां कूष्मांडा आरती का समय
पूजा के समापन पर मां कूष्मांडा की आरती करना अनिवार्य है। सुबह की आरती मुख्य पूजा के बाद और संध्या आरती सूर्यास्त के समय करना सबसे अच्छा होता है। आरती के समय परिवार का एक साथ होना आपसी तालमेल और सकारात्मकता को बढ़ाता है।
मां कूष्मांडा की कृपा से साधक के सभी रोग और शोक समाप्त होने की संभावना रहती है। आरती के बाद अपनी इच्छाएं मां के चरणों में रखें और धैर्यपूर्वक फल की प्रतीक्षा करें। सच्ची श्रद्धा से की गई यह पूजा भविष्य की बाधाओं को दूर करती है।