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रंगभरी एकादशी: पूजा विधि और महत्व जानें

रंगभरी एकादशी का पर्व सनातन धर्म में विशेष महत्व रखता है। यह हर साल फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। जानें इस साल रंगभरी एकादशी कब मनाई जाएगी, इसकी पूजा विधि और धार्मिक महत्व।
 

रंगभरी एकादशी का महत्व


रंगभरी एकादशी का विशेष महत्व
सनातन धर्म में रंगभरी एकादशी का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह पर्व हर साल फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है, जिसे आमलकी एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विशेष महत्व है। वाराणसी में इस पर्व को धूमधाम से मनाया जाता है, और यह होली के त्योहार की शुरुआत का प्रतीक है।


रंगभरी एकादशी की तिथि

रंगभरी एकादशी कब मनाई जाएगी?


द्रिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 27 फरवरी को रात 12:33 बजे से शुरू होगी और यह रात 10:32 बजे तक रहेगी। इसलिए, उदयातिथि के अनुसार, रंगभरी एकादशी का व्रत 27 फरवरी, शुक्रवार को रखा जाएगा। इसका पारण 28 फरवरी को सुबह 6:47 से 9:06 बजे के बीच किया जा सकता है।


पूजा विधि

रंगभरी एकादशी पूजा विधि


इस दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। एक लोटे में जल, चंदन, बेलपत्र और अबीर-गुलाल लेकर शिव मंदिर जाएं। पहले शिवलिंग पर चंदन लगाएं, फिर बेलपत्र और जल अर्पित करें। अंत में अबीर-गुलाल चढ़ाएं और भगवान शिव से जीवन की कठिनाइयों को दूर करने की प्रार्थना करें।


रंगभरी एकादशी का धार्मिक महत्व

रंगभरी एकादशी का महत्व


धार्मिक मान्यता के अनुसार, फाल्गुन माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर भगवान शिव और माता पार्वती पहली बार काशी आए थे। उस समय देवताओं ने उनका स्वागत दीप जलाकर और फूलों, गुलाल तथा अबीर उड़ाकर किया था। तभी से रंगभरी एकादशी का पर्व मनाया जाने लगा।