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रवि प्रदोष व्रत: शिव की पूजा का सही समय और विधि

रवि प्रदोष व्रत हर महीने की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है, जिसमें भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है। इस दिन भक्तों को शिव की कृपा से जीवन के सभी दुखों से मुक्ति मिलती है। जानें इस व्रत का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि, जिससे आप सही तरीके से भगवान शिव की आराधना कर सकें।
 

प्रदोष काल का शुभ मुहूर्त


Ravi Pradosh Vrat, नई दिल्ली: हर महीने की कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत का आयोजन किया जाता है। आज आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष का प्रदोष व्रत है, जो रविवार को मनाया जा रहा है, इसलिए इसे रवि प्रदोष व्रत कहा जाता है। शिव पुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व बताया गया है।


प्रदोष व्रत का महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार, रवि प्रदोष व्रत रखने से जीवन के सभी दुख और संकट समाप्त हो जाते हैं। भोलेनाथ की कृपा से घर में धन और अन्न की कमी नहीं होती। मृत्यु के बाद आत्मा को शिव धाम में स्थान मिलता है। प्रदोष व्रत के दिन प्रदोष काल का महत्व बढ़ जाता है, क्योंकि इसी समय भगवान शिव की पूजा की जाती है।


शिव पूजा का शुभ मुहूर्त

रवि प्रदोष व्रत पर भगवान शिव की पूजा का शुभ मुहूर्त आज शाम 07:16 बजे से शुरू होगा और यह रात 09:21 बजे तक रहेगा। इस दौरान भक्तों को शिव पूजन के लिए 2 घंटे 5 मिनट का समय मिलेगा।


रवि प्रदोष व्रत की पूजा विधि

रवि प्रदोष व्रत के दिन, शाम को स्नान करने के बाद शिव पूजन की तैयारी करें। पूजा के समय सबसे पहले भगवान शिव और माता पार्वती का स्मरण करें। फिर शिवलिंग पर जल और गंगाजल चढ़ाएं। प्रदोष व्रत के दिन शिवलिंग पर दूध, दही, शहद और घी से अभिषेक करने की परंपरा है।


अभिषेक के बाद शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा और फूल चढ़ाएं। भगवान शिव को बेलपत्र प्रिय होते हैं, इसलिए इसके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। इसके बाद धूप और दीप जलाएं। रवि प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें या सुनें और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। अंत में आरती करके पूजा का समापन करें।