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राधा अष्टमी 2023: पूजा विधि और महत्व

राधा अष्टमी, जो इस वर्ष 31 अगस्त को मनाई जाएगी, श्री राधा रानी के जन्म का पर्व है। इस दिन भक्तजन विशेष पूजा और आराधना करते हैं। जानें इस दिन के महत्व, पूजा विधि और विशेष उपायों के बारे में। राधा अष्टमी पर विधिपूर्वक पूजा करने से जीवन में सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
 

राधा अष्टमी का महत्व

भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को श्री राधा रानी का जन्म हुआ था, जिसे राधा अष्टमी के रूप में मनाया जाता है। यह दिन हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है और इसे श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष राधा अष्टमी का पर्व 31 अगस्त को मनाया जाएगा। तिथि की शुरुआत 30 अगस्त को रात 10:46 बजे होगी और समाप्ति 31 अगस्त को रात 12:57 बजे होगी। इस दिन विशेष रूप से बरसाना और मथुरा-वृंदावन में भव्य आयोजन होते हैं। भक्तजन राधा-कृष्ण की आराधना कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन विधिपूर्वक पूजा करने से जीवन में सुख और समृद्धि आती है।


राधा अष्टमी तिथि

अष्टमी तिथि आरंभ: 30 अगस्त, रात्रि 10:46 बजे से


अष्टमी तिथि समाप्त: 31 अगस्त, देर रात 12:57 बजे तक


उदयातिथि के अनुसार राधा अष्टमी 31 अगस्त को मनाई जाएगी।


राधा अष्टमी शुभ मुहूर्त

पूजा का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त: 31 अगस्त, प्रातः 11:05 बजे से दोपहर 1:38 बजे तक रहेगा।


राधा अष्टमी पर उपाय

भविष्यवक्ता डा. अनीष व्यास के अनुसार, इस दिन सुबह स्नान करके राधा-कृष्ण की पूजा करें। कथा और मंत्रजप के साथ जरूरतमंदों को दान करें। ऐसा करने से जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।


विवाह में बाधा दूर करने के लिए मंत्र

अगर विवाह में बाधा आ रही हो, तो राधा अष्टमी के दिन 'ॐ ह्रीं श्री राधिकायै नमः' मंत्र का जप करें। इससे विवाह में आ रही रुकावटें समाप्त होती हैं।


राधा अष्टमी के दिन क्या करें

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। व्रत और पूजा का संकल्प लें। राधा रानी को ताजे फल, दूध और फूल अर्पित करें। पूजा के बाद व्रत की कथा का पाठ करें।


राधा अष्टमी व्रत के दिन क्या न करें

भोग अर्पित करते समय उसे चखना वर्जित है। व्रत के दिन सोना अनुचित माना जाता है। इस दिन बाल, नाखून या दाढ़ी काटना भी वर्जित है।


पूजा सामग्री

पुष्प और फूलों की माला


रोली एवं अक्षत


सुगंध और चंदन


सिंदूर


फल


केसरयुक्त खीर


राधा रानी के वस्त्र और आभूषण


इत्र


देसी घी का दीपक


अभिषेक के लिए पंचामृत


राधा अष्टमी पूजा विधि

प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा स्थान पर राधा रानी की प्रतिमा स्थापित करें और षोडशोपचार विधि से पूजन करें। अंत में आरती करें और भोग अर्पित करें।