राम मंदिर चढ़ावे चोरी प्रकरण में एसआईटी की रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे
राम मंदिर चढ़ावे चोरी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट
राम मंदिर चढ़ावे चोरी प्रकरण की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट एसआईटी ने सौंपी, कमेटी के 25 से 30 सदस्य पूरे गबन में रहे शामिल
लखनऊ: हाल ही में सामने आए श्री राम मंदिर चढ़ावे चोरी मामले की प्रारंभिक रिपोर्ट, जिसे एसआईटी ने आज सुबह अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद को प्रस्तुत किया, में कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए हैं। रिपोर्ट में यह बताया गया है कि गबन की राशि अपेक्षा से कहीं अधिक है और इसमें 25 से 30 लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल के महाकुंभ और इस साल के माघ मेले के दौरान करोड़ों रुपए का गबन किया गया।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि इन आयोजनों के दौरान अयोध्या दर्शन के लिए लाखों श्रद्धालु पहुंचे, जिससे चढ़ावे की राशि में भारी वृद्धि हुई। गबन करने वालों ने इस अवसर का लाभ उठाते हुए एक दिन में 10 से 15 लाख रुपए तक की राशि चुराई। रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि राम मंदिर से दान राशि का इतना बड़ा गबन किसी एक व्यक्ति का कार्य नहीं था, बल्कि यह भाई-भतीजावाद, सुरक्षा में चूक और गिनती की प्रक्रिया में खामियों का परिणाम था।
चढ़ावे चोरी से कमीशनखोरी तक का खेल
एसआईटी ने मंगलवार को अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद को चढ़ावे चोरी प्रकरण की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंपी। इस रिपोर्ट में चढ़ावे चोरी और कमीशनखोरी के सबूत भी शामिल हैं। मंदिर में कर्मचारियों की नियुक्ति और गणना प्रक्रिया में बड़े हेरफेर की आशंका जताई गई है। एसआईटी ने इस संबंध में कई साक्ष्य एकत्र किए हैं और गवाहों का भी उल्लेख किया है।
एसआईटी में शामिल लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, लखनऊ आईजी रेंज किरन एस और विशेष सचिव वित्त नील रतन ने सुबह करीब 11 बजे शासन में रिपोर्ट प्रस्तुत की। अब यह रिपोर्ट मुख्यमंत्री के समक्ष रखी जाएगी। सूत्रों के अनुसार, चढ़ावे चोरी में 25-30 लोगों की सीधी भूमिका पाई गई है, और इन सभी पर जल्द ही केस दर्ज किया जा सकता है। अनिल मिश्रा पर 40 प्रतिशत कमीशन लेने के आरोपों का भी उल्लेख किया गया है।
ट्रस्ट के पदाधिकारियों की भूमिका
रिपोर्ट में ट्रस्ट के पदाधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। कुछ पदाधिकारियों की संलिप्तता का अंदेशा जताया गया है, जबकि कुछ को लापरवाही का दोषी पाया गया है। जिनकी निगरानी में चढ़ावे की चोरी हुई, उनमें ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, अनिल मिश्रा और निर्माण सहायक गोपाल राव का नाम शामिल है।