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रोहिणी व्रत 2026: आत्मिक शुद्धि और मानसिक शांति का मार्ग

रोहिणी व्रत 2026 का विशेष महत्व है, जो जैन धर्म में आध्यात्मिक उन्नति और मानसिक शांति का प्रतीक है। यह व्रत हर महीने उस दिन मनाया जाता है, जब सूर्योदय के समय रोहिणी नक्षत्र का प्रभाव होता है। इस वर्ष, यह 14 जून को मनाया जाएगा। जानें इस व्रत के पीछे की धार्मिक मान्यता और इसके लाभ, जो जीवन में सुख और समृद्धि लाने में सहायक होते हैं।
 

रोहिणी व्रत का महत्व


रोहिणी व्रत 2026: जून महीने में व्रतों की श्रृंखला में रोहिणी व्रत का विशेष स्थान है। जैन धर्म में इस व्रत का आध्यात्मिक महत्व अत्यधिक माना जाता है। यह व्रत हर महीने उस दिन मनाया जाता है, जब सूर्योदय के समय रोहिणी नक्षत्र का प्रभाव होता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को श्रद्धा और नियमों के साथ करने से जीवन में सुख, समृद्धि, शांति और आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति होती है। इस दिन जैन धर्म के 12वें तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य स्वामी की विशेष पूजा की जाती है। परंपरा के अनुसार, रोहिणी व्रत का संकल्प 3, 5 या 7 वर्षों के लिए लिया जाता है, जिसमें 5 वर्ष और 5 महीने की अवधि को विशेष रूप से श्रेष्ठ माना जाता है।


जून 2026 में रोहिणी व्रत:
पंचांग और नक्षत्र गणना के अनुसार, रोहिणी व्रत 14 जून 2026, रविवार को मनाया जाएगा। इस दिन सूर्योदय के समय रोहिणी नक्षत्र का प्रभाव रहेगा, जिससे यह तिथि व्रत, पूजा और आराधना के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है।


रोहिणी व्रत का महत्व:
आत्मिक शुद्धि: यह व्रत पुराने कर्मों के नाश, आत्मसंयम और मानसिक शांति का मार्ग प्रशस्त करता है। महिलाएं विशेष रूप से अपने पति की दीर्घायु और परिवार के कल्याण के लिए यह व्रत करती हैं।


धार्मिक मान्यता के अनुसार, रोहिणी व्रत को श्रद्धा और संयम के साथ करने से जीवन के अनेक कष्टों का निवारण होता है। इसके साथ ही आर्थिक समस्याओं, मानसिक तनाव और पारिवारिक बाधाओं से भी राहत मिलने की उम्मीद होती है।