विधाता माता: उज्जैन में अद्भुत मंदिर और उसकी मान्यताएँ
उज्जैन में स्थित विधाता माता का मंदिर एक अद्भुत धार्मिक स्थल है, जहाँ माता के बारे में कई मान्यताएँ प्रचलित हैं। कहा जाता है कि विधाता माता बच्चे के जन्म के छठे दिन उसका भाग्य लिखती हैं। इस मंदिर का इतिहास 1500 साल पुराना है और यहाँ की मूर्ति को स्वयंभू माना जाता है। श्रद्धालु दूर-दूर से यहाँ आते हैं, ताकि उनके बच्चों को सौभाग्य प्राप्त हो सके। जानें इस मंदिर की स्थापना की कहानी और माता के महत्व के बारे में।
Jul 25, 2026, 09:34 IST
विधाता माता का परिचय
क्या आप विधाता माता के बारे में जानते हैं? यदि नहीं, तो आज हम आपको उनके बारे में जानकारी देने जा रहे हैं। विधाता माता को विभिन्न स्थानों पर अलग-अलग नामों से जाना जाता है, जैसे भय माता, बेमाता, विधात्री देवी, छठी मैया और षष्ठी माता। लोक मान्यता के अनुसार, बच्चे के जन्म के छठे दिन विधाता देवी उसके भाग्य का लेखा-जोखा लिखती हैं।
उज्जैन में स्थित मंदिर
महाकाल की नगरी उज्जैन में विधाता देवी का प्रसिद्ध मंदिर है। यह मंदिर पटनी बाजार के निकट मगरमुहा की गली में स्थित है और इसका इतिहास लगभग 1500 साल पुराना है। यहाँ विधाता देवी की लगभग ढाई फीट ऊँची खड़ी अवस्था में मूर्ति स्थापित है, जिसे स्वयंभू माना जाता है।
मूर्ति का महत्व
विधाता देवी के बाएँ हाथ में कपाल है और दाएँ हाथ में कलम। इनके चारों ओर दो दूत भी उपस्थित हैं, जिनके नाम चित्र और गुप्त हैं। मान्यता है कि जब भी किसी बच्चे का जन्म होता है, ये दूत माता को इसकी सूचना देते हैं।
श्रद्धालुओं की भीड़
विधाता माता का उल्लेख देवी भागवत, दुर्गा सप्तशती और अवंतिका पुराण में मिलता है। उनका पौराणिक नाम विद्यात्तय है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, विधाता माता बच्चे के जन्म के छठे दिन उसका भाग्य लिखती हैं, इसलिए दूर-दूर से श्रद्धालु यहाँ आते हैं। वे मंदिर में दर्शन करते हैं ताकि उनके बच्चों को सौभाग्य प्राप्त हो सके।
मूर्ति की स्थापना की कहानी
कहा जाता है कि एक भक्त को माता ने सपने में दर्शन दिए थे और उस स्थान पर मूर्ति होने का संकेत दिया था। जब वहाँ खुदाई की गई, तो विधाता देवी की मूर्ति प्राप्त हुई। इसके बाद उसी स्थान पर मूर्ति की स्थापना की गई और मंदिर का निर्माण किया गया। तभी से यह मंदिर यहाँ स्थित है।