विभुवन संकष्टी चतुर्थी 2026: गणेश पूजा का महत्व और विधि
विभुवन संकष्टी चतुर्थी 2026 का महत्व
विभुवन संकष्टी चतुर्थी 2026: सनातन धर्म में भगवान गणेश की पूजा सबसे पहले की जाती है, जिन्हें विघ्नहर्ता माना जाता है। गणेश जी को रिद्धि और सिद्धि का देवता माना जाता है। बुधवार का दिन विशेष रूप से भगवान गणेश को समर्पित है। वर्ष 2026 में विभुवन संकष्टी चतुर्थी का व्रत 3 जून, बुधवार को मनाया जाएगा। यह व्रत अधिक मास (मलमास) के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को आयोजित किया जाता है, जो लगभग तीन साल में एक बार आता है।
पूजा विधि और महत्व
इस व्रत में चंद्रमा को अर्घ्य देना अत्यंत महत्वपूर्ण है। ज्योतिष के अनुसार, चंद्रमा को जल चढ़ाना मानसिक शांति और सुख-समृद्धि के लिए एक पवित्र अनुष्ठान है। इसे विशेष रूप से पूर्णिमा, करवा चौथ, और संकष्टी चतुर्थी पर किया जाता है।
विभुवन संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश को पान, फल, फूल और मोदक का भोग अर्पित करें। पूजा के दौरान ध्यान रखें कि गणेश जी को खंडित या सूखे चावल नहीं चढ़ाने चाहिए।
दीपक के साथ गणेश जी की पूजा करें और उनके मंत्रों का जाप करें। इसके बाद, गणेश जी की आरती करें और पूरे दिन उपवास रखने के बाद शाम को पुनः विधि-विधान से पूजा करें।