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वैशाख अमावस्या: तर्पण और दान का महत्व

वैशाख अमावस्या, जो 17 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी, पितृ तर्पण और दान का विशेष महत्व रखती है। इस दिन श्रद्धालु कुरुक्षेत्र और हरिद्वार जैसे पवित्र स्थलों पर जाकर आस्था की डुबकी लगाएंगे। ज्योतिषियों के अनुसार, इस बार अमावस्या पर सर्वार्थ सिद्धि योग का अद्भुत संयोग बन रहा है। जानें इस दिन के लिए सही मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में, ताकि आप इस पुण्य अवसर का लाभ उठा सकें।
 

अंबाला में वैशाख अमावस्या का महत्व

अंबाला, 14 अप्रैल। हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख महीने की अमावस्या का दिन पितृ तर्पण और दान-पुण्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस वर्ष यह विशेष तिथि 17 अप्रैल 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी। ज्योतिषियों के अनुसार, इस बार अमावस्या पर सर्वार्थ सिद्धि योग का अद्भुत संयोग बन रहा है, जो श्रद्धालुओं को सिद्धियां प्राप्त करने और बाधाओं को दूर करने का सुनहरा अवसर प्रदान करेगा। हरियाणा और आस-पास के क्षेत्रों के लोग इस दिन कुरुक्षेत्र के ब्रह्मसरोवर या हरिद्वार जैसे पवित्र स्थलों पर आस्था की डुबकी लगाने के लिए पहुंचेंगे।


तिथि और मुहूर्त का सही समय

तिथि और मुहूर्त का सटीक गणित


अमावस्या तिथि की शुरुआत 16 अप्रैल को रात 8:11 बजे से होगी और इसका समापन 17 अप्रैल को शाम 5:21 बजे होगा। शास्त्रों के अनुसार, स्नान-दान और व्रत 17 अप्रैल को ही करना चाहिए। पूजा के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:09 से 5:09 बजे तक रहेगा। यदि आप किसी विशेष कार्य की शुरुआत या बड़ा दान करना चाहते हैं, तो दोपहर 11:55 से 12:45 बजे तक का अभिजीत मुहूर्त सबसे शुभ रहेगा।


पूजा और तर्पण की विधि

ऐसे करें पूजा और तर्पण की शुरुआत


इस विशेष दिन की शुरुआत ब्रह्म मुहूर्त में स्नान से करें। यदि आप गंगा या यमुना जैसी किसी पवित्र नदी पर नहीं जा पा रहे हैं, तो घर पर ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाएं। स्नान के बाद साफ वस्त्र पहनकर व्रत का संकल्प लें और तांबे के लोटे से सूर्य देव को अर्घ्य दें। सूर्य को जल अर्पित करने से न केवल स्वास्थ्य में सुधार होता है, बल्कि जीवन में सकारात्मकता भी आती है। इसके बाद दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों का तर्पण करें और उनके नाम पर भोजन या वस्त्र का दान करें।


दान और सेवा का महत्व

दान और सेवा से मिटेंगे कष्ट


वैशाख की गर्मी में किए गए दान का महत्व शास्त्रों में विस्तार से वर्णित है। पितरों की शांति के लिए इस दिन मिट्टी का घड़ा (मटका), सत्तू, छाता या खरबूजे का दान करना चाहिए। मान्यता है कि वैशाख अमावस्या पर जरूरतमंदों को पानी पिलाना और छाया की व्यवस्था करना व्यक्ति को गंभीर रोगों और आर्थिक तंगी से मुक्ति दिलाता है। पूर्वजों के नाम पर पीपल या बरगद का पौधा लगाना भी इस तिथि पर अत्यंत शुभ माना जाता है।