शनि देव की साढ़ेसाती से राहत पाने के उपाय
शनि देव: कर्मों के अनुसार फल देने वाले
हिंदू धर्म में शनि देव को कर्मों का फल देने वाला और न्याय का देवता माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र में शनि का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। शनि ग्रह की गति सबसे धीमी होती है, और यह लोगों को उनके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करता है। शनि की साढ़ेसाती का भय लोगों में अधिक होता है, क्योंकि यह वह समय होता है जब शनि उनके कर्मों का हिसाब लेते हैं।
इस अवधि में शनि जीवन की कई महत्वपूर्ण सीख देते हैं, और इस दौरान कई आर्थिक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। शनिवार का दिन विशेष रूप से शनि देव को समर्पित है, और इस दिन पूजा, व्रत और विशेष उपाय किए जाते हैं। शनि के कुछ मंत्रों का जाप करने से साढ़ेसाती का प्रभाव कम किया जा सकता है।
साढ़ेसाती से राहत पाने के लिए मंत्र
- ॐ शन्नोदेवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये।संयोरभिश्रवन्तु न:। ऊँ शं शनैश्चराय नम:।।
- ऊँ नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्। छायामार्तण्डसंभूतं तं नमामिशानश्चराम।।
- ॐ शन्नोदेवीरभिस्ताय आपो भवन्तु पीतये
- शनयोरभिस्रवन्तु न:, ॐ समं शनैश्चराय नम:।
- ॐ नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजं
- छायामार्तण्डसंभूतं तम नमामि शनैश्चरम।
- ऊँ त्रयम्बकं यजामहे सुगंधिम पुष्टिवर्धनम्।
उवार्रुक मिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मा मृतात्।।
शनि देव के अन्य मंत्र
- शनि बीज मंत्र: ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम:।
- शनि मूल मंत्र: ॐ शं शनैश्चराय नम:।
साढ़ेसाती और ढैय्या के उपाय
हर शनिवार सुबह स्नान के बाद पीपल के पेड़ की जड़ में जल अर्पित करें और 7 बार परिक्रमा करें। इस दिन शनिदेव की विधिपूर्वक पूजा करें और श्रद्धा से शनि स्तुति का पाठ करें। शनिवार को बजरंगबली की पूजा भी करें और नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करें।
अपने सामर्थ्य के अनुसार काले तिल, साबुत उड़द, गुड़ और सरसों के तेल का दान करें। इन उपायों को करने से साढ़ेसाती और ढैय्या से मुक्ति मिलती है।