☰
×

शारदीय नवरात्र 2026: देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा और भोग

शारदीय नवरात्र 2026 का पर्व 11 अक्टूबर से शुरू हो रहा है, जिसमें मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाएगी। हर दिन विशेष भोग अर्पित करने की परंपरा है, जो भक्तों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती है। जानें किस दिन कौन-सी देवी की पूजा होती है और किस भोग का महत्व है।
 

नवरात्र का शुभारंभ

लखनऊ। इस वर्ष शारदीय नवरात्र का पर्व 11 अक्टूबर, 2026, रविवार से प्रारंभ हो रहा है। इस दौरान मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा विधिपूर्वक की जाएगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार, नवरात्र के हर दिन मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना की जाती है। भक्तों द्वारा उन्हें उनके पसंदीदा भोग अर्पित करने की परंपरा भी है। ऐसा माना जाता है कि श्रद्धा और भक्ति से भोग अर्पित करने पर देवी मां प्रसन्न होती हैं और भक्तों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।


नवरात्र के दिन और भोग

पहला दिन—मां शैलपुत्री

नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। इस दिन घी का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है, जिससे भक्तों को स्वास्थ्य और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।


दूसरा दिन—मां ब्रह्मचारिणी

दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है, जिसमें चीनी या शक्कर का भोग अर्पित किया जाता है। इससे दीर्घायु और संयम की प्राप्ति होती है।


तीसरा दिन—मां चंद्रघंटा

तीसरे दिन मां चंद्रघंटा को दूध या दूध से बनी मिठाई का भोग अर्पित किया जाता है, जिससे सुख-शांति और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।


चौथा दिन—मां कूष्मांडा

चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा होती है, जिसमें मालपुए का भोग अर्पित किया जाता है। इससे बुद्धि और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।


पांचवां दिन—मां स्कंदमाता

पांचवें दिन मां स्कंदमाता की आराधना की जाती है, जिसमें केले का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। इससे परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।


छठा दिन—मां कात्यायनी

छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा होती है। इस दिन शहद का भोग अर्पित करने से आत्मविश्वास और सकारात्मकता बढ़ती है।


सातवां दिन—मां कालरात्रि

सप्तमी तिथि पर मां कालरात्रि की पूजा होती है। गुड़ का भोग अर्पित करने से नकारात्मक शक्तियों और भय से मुक्ति की कामना की जाती है।


आठवां दिन—मां महागौरी

अष्टमी के दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है, जिसमें नारियल का भोग अर्पित किया जाता है। इससे मनोकामनाएं पूरी होने और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।


नौवां दिन—मां सिद्धिदात्री

नवरात्र के अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की आराधना की जाती है। इस दिन तिल और हलवा-पूरी का भोग अर्पित करने की परंपरा है, जिससे देवी मां भक्तों को सिद्धि और सफलता का आशीर्वाद देती हैं।


पूजा के दौरान ध्यान देने योग्य बातें

ध्यान रखें

भोग अर्पित करते समय श्रद्धा और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। विभिन्न क्षेत्रों और परंपराओं में देवी को चढ़ाए जाने वाले भोग में भिन्नता हो सकती है, इसलिए स्थानीय परंपरा या परिवार के अनुसार पूजा करना उचित है।


नोट: ये सभी बातें धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित हैं। इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं देखना चाहिए।