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शुक्र प्रदोष व्रत: जानें शुभ मुहूर्त और महत्व

शुक्र प्रदोष व्रत हर माह की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है, जिसमें महादेव और मां पार्वती की पूजा का महत्व है। इस बार 12 जून को होने वाले इस व्रत में सर्वार्थ सिद्धि योग का महासंयोग भी है। जानें इस दिन के शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में, जिससे आप अपने जीवन में सुख और शांति प्राप्त कर सकें।
 

महादेव की पूजा का विशेष दिन


महादेव की पूजा का महत्व
प्रत्येक माह की कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत का आयोजन किया जाता है। इस दिन भक्त महादेव और मां पार्वती की विशेष पूजा करते हैं। यह व्रत जीवन में आने वाले सभी भय से मुक्ति दिलाने के लिए किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन महादेव की आराधना करने से भक्त के जीवन में सुख और शांति बनी रहती है।


इस बार प्रदोष व्रत के अवसर पर सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 05:23 से 06:28 बजे तक रहेगा, जो किसी महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत के लिए शुभ माना जाता है। आइए जानते हैं कि जून में पहला प्रदोष व्रत कब है और इसके शुभ मुहूर्त के बारे में।


शुक्र प्रदोष व्रत की तिथि


  • वैदिक पंचांग के अनुसार, 12 जून को शुक्र प्रदोष व्रत मनाया जाएगा।

  • ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 12 जून को रात 07:36 बजे होगी।

  • इस तिथि का समापन 13 जून को शाम 04:07 बजे होगा।

  • महादेव की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 07:36 से 09:20 बजे तक रहेगा।


शुभ मुहूर्त


  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:02 से 04:42 बजे तक

  • अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:53 से 12:49 बजे तक

  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:40 से 03:36 बजे तक

  • गोधूलि मुहर्त: शाम 07:18 से 07:38 बजे तक

  • निशिता मुहर्त: रात 12:01 से 12:48 बजे तक


महादेव की पूजा से पापों का नाश

धार्मिक मान्यता के अनुसार, प्रदोष काल में महादेव की पूजा करने से भक्त के द्वारा किए गए सभी पाप समाप्त हो जाते हैं। महादेव जल्दी प्रसन्न होते हैं और भक्त के जीवन में धान्य और समृद्धि का वास होता है। इस पूजा से तनाव और नकारात्मक विचारों का नाश होता है, जिससे मानसिक शांति प्राप्त होती है।