सावन का दूसरा प्रदोष व्रत: तिथि, पूजा विधि और महत्व
सावन मास और भगवान शिव की पूजा
श्रावण का महीना भगवान शिव के लिए विशेष रूप से प्रिय माना जाता है। इस दौरान भक्तजन सच्चे मन से भोलेनाथ की आराधना करते हैं, जिससे उन्हें शुभ फल की प्राप्ति होती है। इस महीने में भक्त भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए विभिन्न उपाय करते हैं। विशेष रूप से, इस महीने में आने वाले सोमवार व्रत का महत्व अत्यधिक है, लेकिन प्रदोष व्रत को और भी अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।
प्रदोष व्रत की तिथियाँ
इस वर्ष सावन में दो प्रदोष व्रत होंगे। पहला व्रत सावन के दूसरे सोमवार को था, जबकि दूसरा प्रदोष व्रत सावन शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को होगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, प्रदोष व्रत का नाम उसी दिन के अनुसार होता है जिस दिन यह पड़ता है। उदाहरण के लिए, यदि यह सोमवार को हो, तो इसे सोम प्रदोष कहा जाता है। इसी तरह, शनिवार को शनि प्रदोष और मंगलवार को भौम प्रदोष कहा जाता है।
दूसरा प्रदोष व्रत कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार, सावन महीने की शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त इस प्रकार है:
- त्रयोदशी तिथि आरंभ: 25 अगस्त 2026, मंगलवार, प्रातः 06:20 बजे से
- त्रयोदशी तिथि समापन: 26 अगस्त 2026, बुधवार, प्रातः 07:59 बजे पर
प्रदोष व्रत उसी दिन मनाया जाता है जब प्रदोष काल का शुभ समय होता है। इसलिए, सावन का दूसरा प्रदोष व्रत 25 अगस्त को मनाया जाएगा। चूंकि यह मंगलवार को पड़ रहा है, इसे भौम प्रदोष कहा जाएगा।
प्रदोष व्रत पूजा का शुभ मुहूर्त
- सावन प्रदोष व्रत ब्रह्म मुहूर्त: 25 अगस्त, प्रातः 04:27 बजे से 05:11 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: प्रातः 11:57 बजे से 12:49 बजे तक
- विजय मुहर्त: दोपहर 02:32 बजे से 03:24 बजे तक
- प्रदोष काल का शुभ मुहूर्त: सायं 06:51 बजे से 09:04 बजे तक
भगवान शिव की पूजा प्रदोष काल में करना शुभ माना जाता है, इसलिए इस समय में भौम प्रदोष की पूजा करें।
सावन के दूसरे प्रदोष व्रत का महत्व
इस बार सावन का दूसरा प्रदोष व्रत मंगलवार को है, जिस दिन मंगला गौरी व्रत भी मनाया जाएगा। इस कारण इस व्रत का महत्व और भी बढ़ जाता है। इस दिन, भक्त भगवान शिव के साथ माता गौरी की पूजा करेंगे, जिससे उनकी कई समस्याएँ दूर हो सकती हैं। साथ ही, हनुमान जी की पूजा करने से सभी बाधाएँ समाप्त होंगी। जो भक्त इस व्रत को सच्चे मन से करते हैं, उन्हें स्वास्थ्य और धन का आशीर्वाद प्राप्त होता है।