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सावन का पहला सोमवार: पूजा विधि और तिथियाँ

सावन का पहला सोमवार 3 अगस्त 2026 को है, जो भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन लाखों भक्त व्रत रखते हैं और शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं। जानें इस दिन की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और सावन के चारों सोमवार की तिथियाँ। साथ ही, कुछ राज्यों में सावन के शुरू होने की अलग-अलग तिथियों के बारे में भी जानकारी प्राप्त करें।
 

सावन सोमवारी तिथि और पूजा विधि


सावन सोमवारी तिथि | सावन का पहला सोमवार पूजा विधि: सावन का पहला सोमवार 3 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा। यह महीना भगवान शिव की पूजा के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस दौरान लाखों भक्त व्रत रखते हैं, शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं और 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करते हैं। सावन की शुरुआत 30 जुलाई से हो चुकी है और पहला सोमवार आज है। देशभर के शिव मंदिरों में भक्तों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। यदि आप पहली बार सावन सोमवार का व्रत रख रहे हैं या पूजा विधि और शुभ समय के बारे में जानना चाहते हैं, तो यहां सभी आवश्यक जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध है।


3 अगस्त 2026 का शुभ पूजा मुहूर्त

सावन के पहले सोमवार पर पूजा के लिए निम्नलिखित शुभ समय निर्धारित किए गए हैं:


ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:19 बजे से 5:01 बजे तक


अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:00 बजे से 12:54 बजे तक


मान्यता है कि ब्रह्म मुहूर्त में की गई पूजा का विशेष फल मिलता है। यदि समय की कमी के कारण सुबह जल्दी पूजा करना संभव न हो, तो भक्त अपनी सुविधा अनुसार सुबह या शाम भी भगवान शिव का अभिषेक कर सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण है श्रद्धा और सच्ची भक्ति।


सावन सोमवार की पूजा विधि

पूजा करने से पहले, पूजा स्थल और शिवलिंग को अच्छे से धोकर साफ करें।


शिव जी का ध्यान करते हुए मन में व्रत रखने का संकल्प लें।


शिवलिंग पर पहले सादा पानी और फिर गंगाजल चढ़ाएं।


दूध, दही, घी, शहद और शक्कर मिलाकर पंचामृत बनाएं और उससे शिवलिंग का अभिषेक करें। इस दौरान 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का 108 बार जाप करें।


सावन 2026 के चारों सोमवार की तिथियाँ

उत्तर भारत के राज्यों में सावन 2026 के चार सोमवार इस प्रकार हैं:


पहला सावन सोमवार: 3 अगस्त 2026


दूसरा सावन सोमवार: 10 अगस्त 2026


तीसरा सावन सोमवार: 17 अगस्त 2026


चौथा सावन सोमवार: 24 अगस्त 2026


कुछ राज्यों में सावन बाद में क्यों शुरू होता है?

महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों में अमांत पंचांग का पालन किया जाता है। इस कारण, इन राज्यों में सावन मास उत्तर भारत की तुलना में लगभग 15 दिन बाद शुरू होता है। इसलिए यदि आपके किसी रिश्तेदार या मित्र के यहां सावन की तिथियाँ अलग हैं, तो यह किसी भ्रम की वजह से नहीं बल्कि अलग-अलग पंचांग परंपराओं के कारण है।