सावन शिव पूजा: मंत्र जप की विधि और लाभ
‘ॐ नम: शिवाय’ मंत्र का महत्व
Sawan Shiv Puja, नई दिल्ली: भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए किसी विशेष तैयारी की आवश्यकता नहीं है। उन्हें केवल सच्ची श्रद्धा और भाव की आवश्यकता होती है। शिव पुराण के अनुसार, ‘ॐ नम: शिवाय’ केवल एक मंत्र नहीं है, बल्कि यह ब्रह्मांड की संपूर्ण सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत है।
यह पंचाक्षरी मंत्र हमारे शरीर और ब्रह्मांड के पांच तत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) को संतुलित करता है। आइए जानते हैं कि इस मंत्र का जप कैसे और कितनी बार करना चाहिए।
जप की संख्या का गणित
- हर दिन कम से कम 108 बार (एक माला) जप करें। इससे मानसिक तनाव कम होता है और घर में सकारात्मकता आती है।
- यदि आप कोई विशेष इच्छा पूरी करना चाहते हैं, तो सवा लाख (1,25,000) बार मंत्र का जप करने का संकल्प लें। इसे आप 21, 41 या 51 दिनों में अपनी सुविधा के अनुसार पूरा कर सकते हैं।
- यदि मन अशांत है या किसी अनहोनी का डर है, तो 1008 बार जप करने से तुरंत राहत और अद्भुत साहस मिलता है।
जप की विधि और समय
- सर्वश्रेष्ठ समय ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4 से 6 बजे) है। यदि सुबह संभव न हो, तो शाम को प्रदोष काल में जप करें।
- कभी भी सीधे जमीन पर बैठकर जप न करें। कुशा या ऊनी आसन का उपयोग करें।
- शिव जी के अंश रुद्राक्ष की माला से किया गया जप सबसे प्रभावशाली माना जाता है।
- जप करते समय अपना चेहरा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें।
महामंत्र के लाभ
- यदि आपकी कुंडली में शनि भारी है या चंद्रमा कमजोर है, तो यह मंत्र आपके लिए रामबाण है। यह ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव को कम करता है।
- यह मंत्र शरीर के भीतर की हीलिंग पावर को बढ़ाता है और मन से अकाल मृत्यु जैसे डर को समाप्त कर देता है।
- इसके निरंतर जप से एकाग्रता और आत्मविश्वास बढ़ता है, जिससे ऑफिस और बिजनेस की बाधाएं दूर होने लगती हैं।
शास्त्रों में वर्णन
इस मंत्र की महिमा और इसके नियमों का सबसे विस्तृत वर्णन ‘शिव पुराण’ के विद्येश्वर संहिता में मिलता है। इसके अलावा ‘लिंग पुराण’ और ‘स्कंद पुराण’ में भी बताया गया है कि ‘ॐ नम: शिवाय‘ का निरंतर जप करने से मनुष्य को अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।