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हरियाली अमावस्या 2026: पूजा विधि, महत्व और पौराणिक कथा

हरियाली अमावस्या 2026, जो 12 अगस्त को मनाई जाएगी, भगवान शिव की पूजा और पितरों के तर्पण का विशेष दिन है। इस दिन की पूजा विधि, पौराणिक कथा और धार्मिक महत्व को जानें। यह पर्व प्रकृति के प्रति सम्मान और संरक्षण का संदेश भी देता है। जानें इस दिन के विशेष कार्य और मान्यताएँ।
 

हरियाली अमावस्या 2026 का महत्व


हरियाली अमावस्या 2026: सावन के पवित्र महीने में हरियाली अमावस्या का पर्व इस वर्ष 12 अगस्त, बुधवार को मनाया जाएगा। यह दिन भगवान शिव की पूजा, पितरों के तर्पण, दान-पुण्य और प्रकृति से जुड़ी मान्यताओं के लिए विशेष महत्व रखता है। इसे कई स्थानों पर सावन अमावस्या या श्रावण अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है।


बारिश के मौसम में जब धरती हरी-भरी हो जाती है, तब यह अमावस्या प्रकृति के प्रति सम्मान और संरक्षण का संदेश देती है।


हरियाली अमावस्या 2026 की तिथि और समय

पंचांग के अनुसार, इस वर्ष अमावस्या तिथि 12 अगस्त को रात 1:52 बजे से शुरू होकर रात 11:06 बजे तक रहेगी। इस दिन पूजा, दान, पितृ तर्पण और अन्य धार्मिक कार्यों के लिए 12 अगस्त का दिन विशेष माना गया है।


हरियाली अमावस्या: 12 अगस्त 2026, बुधवार


अमावस्या तिथि शुरू: 12 अगस्त, रात 1:52 बजे


अमावस्या तिथि समाप्त: 12 अगस्त, रात 11:06 बजे


हरियाली अमावस्या पर पूजा विधि

इस दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करें और दीपक जलाएं। भगवान शिव का ध्यान करें।


शिवलिंग पर जल, बेलपत्र, फूल और अपनी श्रद्धा के अनुसार कच्चा दूध अर्पित करें। पूजा के दौरान 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है।


इस दिन पेड़-पौधों की देखभाल और सेवा को भी धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। पीपल, तुलसी और अन्य पौधों को जल देना या पौधे लगाना इस दिन के अच्छे कार्यों में शामिल है।


पौराणिक कथा

किसी समय एक राजा के महल में उसकी बहू रहती थी। एक दिन उसने चोरी-छिपे मिठाई खा ली और अपनी गलती छिपाने के लिए महल में रहने वाले एक चूहे पर दोष डाल दिया। चूहा क्रोधित होकर बदला लेने की ठान लेता है।


कुछ दिनों बाद, जब महल में मेहमान आए, तो चूहा बहू की साड़ी उठाकर राजा के कक्ष में रख देता है। राजा ने बिना सच्चाई जाने बहू को महल से बाहर निकालने का आदेश दे दिया।


महल से बाहर निकलने के बाद, बहू ने पीपल के पेड़ को अपना आसरा बनाया और वहां दीपक जलाने लगी। एक रात राजा के सैनिकों ने दीपक से बातचीत सुनी और सच्चाई जानकर राजा को अपनी गलती का पछतावा हुआ।


दान और पितरों के लिए तर्पण का महत्व

अमावस्या तिथि को पितरों के कर्मों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य के अनुसार पितृ तर्पण, पिंडदान या जरूरतमंदों को भोजन करा सकते हैं।


इस दिन अनाज, कपड़े, हरी सब्जियां, भोजन या धन का दान करना पुण्यकारी माना जाता है। दान करते समय श्रद्धा और अपनी क्षमता का ध्यान रखना चाहिए।


हरियाली अमावस्या का धार्मिक महत्व

'हरियाली' शब्द इस पर्व की भावना को दर्शाता है। सावन में बारिश से सूखी धरती फिर से हरी हो जाती है।


यह दिन मन की नकारात्मकता को दूर करने, भगवान शिव का स्मरण करने और जीवन में नई शुरुआत का संकल्प लेने का अवसर भी है।