हवन की भस्म तिलक: कितने दिनों तक करें उपयोग और इसके लाभ
हिंदू अनुष्ठानों में भस्म तिलक का महत्व
हिंदू धार्मिक अनुष्ठानों में हवन का विशेष स्थान है। हवन में मंत्रों के माध्यम से आहुति दी जाती है, और इस प्रक्रिया में उत्पन्न भस्म का तिलक करना शुभ माना जाता है। कई भक्त इस भस्म का तिलक करते हैं, लेकिन इसके महत्व को समझना आवश्यक है। भस्म को तब तक रखा जा सकता है जब तक सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में नहीं जाता।
तिलक लगाने से आज्ञा चक्र जागृत होता है
हिंदू परंपरा में माथे का विशेष महत्व है, क्योंकि आज्ञा चक्र यहीं स्थित होता है। तिलक लगाने से आज्ञा चक्र सक्रिय होता है और दृष्टि दोष से मुक्ति मिलती है। यह तिलक दिव्य शक्ति का प्रतीक है और हमें सात्विक अवस्था में ले जाता है। पुराणों में उल्लेख है कि राक्षस भी तिलक करते थे, लेकिन उनकी शक्ति का सही उपयोग न कर पाने के कारण वे दुष्ट बने रहते थे।
नकारात्मक ऊर्जा का नाश
भस्म की राख में घी और विभिन्न जड़ी-बूटियाँ होती हैं। इस राख को माथे पर तिलक के रूप में लगाने से नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, सोचने की क्षमता में वृद्धि होती है और मन की भावनाओं को संतुलित किया जा सकता है। इससे बुरी आत्माएँ शरीर में प्रवेश नहीं कर पातीं। वैज्ञानिक दृष्टि से, होम की राख में औषधीय गुण होते हैं, जो सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करते हैं।
भस्म के तिलक के शुभ परिणाम
भस्म का तिलक कई अवसरों पर शुभ परिणाम लाता है। यह परीक्षा देने वाले, विवाह संबंधी चर्चाओं में भाग लेने वाले, भूमि सौदों में शामिल होने वाले, नौकरी के साक्षात्कार में जाने वाले और अदालती कार्यवाही में भाग लेने वाले व्यक्तियों के लिए लाभकारी होता है।