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NASA ने नैन्सी ग्रेस रोमन टेलीस्कोप को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में भेजा

NASA ने अपने नए शक्तिशाली स्पेस टेलीस्कोप 'नैन्सी ग्रेस रोमन' को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में भेजा है। यह टेलीस्कोप डार्क एनर्जी, ब्लैक होल और अन्य ग्रहों पर जीवन की संभावनाओं की खोज करेगा। इसके दायरे में हबल टेलीस्कोप की तुलना में 100 गुना अधिक क्षेत्र शामिल है। यह टेलीस्कोप अपने मिशन के दौरान अरबों आकाशगंगाओं का अध्ययन करेगा। जानें इस मिशन के बारे में और क्या खास है इस टेलीस्कोप में।
 

NASA का नया मिशन


अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने अपने नए शक्तिशाली स्पेस टेलीस्कोप 'नैन्सी ग्रेस रोमन' को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में भेजा है। इसका मुख्य उद्देश्य डार्क एनर्जी, ब्लैक होल और ब्रह्मांड के अनसुलझे रहस्यों की खोज करना है। इस मिशन का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य यह जानना है कि क्या पृथ्वी के अलावा अन्य ग्रहों पर भी जीवन संभव है।


यह टेलीस्कोप फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से स्पेसएक्स के फाल्कन हैवी रॉकेट के माध्यम से लॉन्च किया गया। NASA का मानना है कि 'रोमन टेलीस्कोप' ब्रह्मांड के अध्ययन के तरीके को पूरी तरह से बदल देगा और यह सैकड़ों नए ग्रहों की खोज में सहायक होगा।


नैन्सी ग्रेस रोमन टेलीस्कोप का दायरा हबल स्पेस टेलीस्कोप की तुलना में कम से कम 100 गुना बड़ा है। यह टेलीस्कोप पृथ्वी से लगभग 16 लाख किलोमीटर दूर अपनी निर्धारित कक्षा की ओर बढ़ रहा है, जहां पहुंचने में इसे 100 दिनों का समय लगेगा। इसके बाद यह सौर मंडल के बाहर के ग्रहों की खोज और मैपिंग शुरू करेगा।


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस परियोजना से जुड़े वैज्ञानिकों को बधाई दी और उनके प्रयासों की सराहना की।


इस टेलीस्कोप का नाम प्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी नैन्सी ग्रेस रोमन (1925-2018) के नाम पर रखा गया है, जिन्हें 'मदर ऑफ हबल' कहा जाता है। वह 1960 के दशक में NASA की पहली मुख्य खगोलशास्त्री और पहली महिला कार्यकारी थीं। उन्होंने हबल टेलीस्कोप को अमेरिकी कांग्रेस से मंजूरी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।


NASA के अनुसार, यह टेलीस्कोप अपने 5 से 10 वर्षों के मिशन के दौरान डार्क मैटर, डार्क एनर्जी, ब्लैक होल और अरबों आकाशगंगाओं का अध्ययन करेगा। डार्क मैटर और डार्क एनर्जी की उत्पत्ति अभी भी अज्ञात है, लेकिन माना जाता है कि ब्रह्मांड का लगभग 95 फीसदी हिस्सा इन्हीं से बना है।