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कर्नाटक की नई योजना: झीलों पर तैरते सोलर पैनल से बिजली उत्पादन

कर्नाटक सरकार ने एक नई योजना की घोषणा की है, जिसमें झीलों पर तैरते सोलर पैनल से बिजली उत्पादन किया जाएगा। यह पहल न केवल भूमि की बचत करेगी, बल्कि पानी के वाष्पीकरण को भी कम करेगी। इस तकनीक से कर्नाटक अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम कर सकता है। जानें इस योजना के अन्य लाभ और कार्यप्रणाली के बारे में।
 

सोलर पावर का नया आयाम

कर्नाटक सरकार ने सोलर पावर के क्षेत्र में एक अनोखा कदम उठाने की योजना बनाई है। अब, बिजली उत्पादन के लिए जमीन की आवश्यकता नहीं होगी। राज्य अपनी झीलों और जलाशयों की सतह पर सोलर पैनल स्थापित करने की तैयारी कर रहा है। यह एक नई पहल है, जिसमें सोलर पैनल अब पानी पर तैरेंगे।


इस योजना का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह भूमि की बचत करेगी। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे सोलर प्लांट के लिए उपयुक्त स्थान खोजना कठिन हो गया है।


इसके अलावा, जब सोलर पैनल पानी की सतह पर होंगे, तो वे सूरज की किरणों को पानी तक पहुंचने से रोकेंगे, जिससे वाष्पीकरण में कमी आएगी और लाखों लीटर पानी की बचत होगी।


यह योजना पूरी तरह से ग्रीन एनर्जी पर आधारित है, जिससे न तो प्रदूषण होगा और न ही धुआं। इससे कर्नाटक का पर्यावरण भी साफ-सुथरा रहेगा।


फ्लोटिंग सोलर पावर का यह कॉन्सेप्ट न केवल एक नई तकनीक है, बल्कि यह कई समस्याओं का समाधान भी प्रस्तुत करता है।


इस प्रणाली में, सोलर पैनल को विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए तैरने वाले प्लेटफार्मों पर स्थापित किया जाएगा, जिन्हें झील में सुरक्षित रूप से बांध दिया जाएगा। ये पैनल सूरज की रोशनी से बिजली उत्पन्न करेंगे, ठीक उसी तरह जैसे जमीन पर लगे पैनल करते हैं।


सरकार का लक्ष्य है कि राज्य की प्रमुख झीलों में इस प्रकार के फ्लोटिंग सोलर प्लांट स्थापित किए जाएं, जिससे कर्नाटक अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम कर सके।