ब्लैक होल: अंतरिक्ष के रहस्यमय द्रव्यमान
ब्लैक होल का रहस्य
अंतरिक्ष के अनसुलझे रहस्यों में ब्लैक होल का स्थान सबसे ऊँचा है। इसके नाम के विपरीत, ये वास्तव में कोई 'छेद' नहीं हैं, बल्कि ऐसी जगहें हैं जहां अत्यधिक द्रव्यमान एक सीमित स्थान में समाहित होता है, जिससे उनका गुरुत्वाकर्षण अत्यधिक शक्तिशाली हो जाता है। यह शक्ति इतनी प्रबल होती है कि यहां से प्रकाश भी बाहर नहीं निकल पाता।
इस कारण, ब्लैक होल खुद काले दिखाई देते हैं, क्योंकि वे रोशनी को परावर्तित नहीं करते। इनके चारों ओर गैस और धूल का एक घूमता हुआ छल्ला होता है, जिसे एक्रीशन डिस्क कहा जाता है। यह डिस्क इतनी गर्म होती है कि एक्स-रे और अन्य प्रकार की रोशनी उत्पन्न करती है, जिससे वैज्ञानिक ब्लैक होल के बारे में जानकारी प्राप्त कर पाते हैं।
ब्लैक होल अपनी प्रचंड गुरुत्वाकर्षण शक्ति से दूर से आने वाले प्रकाश को मोड़ देते हैं, जैसे कोई लेंस रोशनी को मोड़ता है। इस प्रभाव के कारण, ब्लैक होल के पीछे स्थित वस्तुओं की छवि विकृत या कई बार दिखाई देने लगती है। वैज्ञानिक इसी प्रभाव का उपयोग उन छिपे हुए ब्लैक होल का पता लगाने के लिए करते हैं जो स्वयं अदृश्य होते हैं। इसे विज्ञान की भाषा में ग्रेविटेशनल लेंसिंग कहा जाता है।
अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ब्लैक होल्स के बारे में जानकारी प्रदान करती है। नासा के अनुसार, ब्लैक होल के केंद्र में एक बिंदु होता है जहां सब कुछ घनत्व में बदल जाता है, जिसे इवेंट होराइजन कहा जाता है। यह एक अदृश्य रेखा है, इसके पार जाने वाला कुछ भी वापस नहीं आ सकता, यहां तक कि प्रकाश भी नहीं। हमारे मिल्की वे गैलेक्सी के केंद्र में एक सुपरमैसिव ब्लैक होल है, जिसे सैजिटेरियस ए स्टार कहा जाता है, जो सूर्य से 40 लाख गुना भारी है।
एक दिलचस्प तथ्य यह है कि यदि कोई वस्तु ब्लैक होल के बहुत करीब पहुंच जाए, तो गुरुत्वाकर्षण के कारण वह लंबाई में खिंचकर नूडल जैसी हो जाती है। इसे स्पेगेटीफिकेशन कहा जाता है। सबसे बड़ा ज्ञात ब्लैक होल टीओएन 618 है, जो सूर्य से 660 अरब गुना भारी है। जबकि सबसे छोटा ज्ञात ब्लैक होल सूर्य से केवल 3.8 गुना भारी है। सभी ब्लैक होल घूमते हैं, कुछ इतनी तेजी से कि वे एक सेकंड में 1,000 से अधिक चक्कर लगा लेते हैं।
ब्लैक होल न तो वर्महोल हैं और न ही सब कुछ खींचने वाला वैक्यूम क्लीनर। ये तब बनते हैं जब बड़े तारे अपने जीवन के अंत में सुपरनोवा में फट जाते हैं। दूर से इनका प्रभाव सामान्य तारों जैसा ही होता है। ये ब्रह्मांड के सबसे बड़े रहस्यों में से एक हैं, जिन्हें समझने के लिए वैज्ञानिक लगातार प्रयास कर रहे हैं।