17 अक्टूबर 2026: मां कालरात्रि की पूजा और सूर्य का राशि परिवर्तन
पंचांग का महत्व और तिथियों की जानकारी
नई दिल्ली - हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व है। किसी भी शुभ कार्य, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ से पहले पंचांग का अवलोकन किया जाता है। यह हिंदू काल-गणना प्रणाली सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है।
17 अक्टूबर 2026 की तिथियाँ
17 अक्टूबर 2026 को आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि सुबह 5:54 बजे से प्रारंभ होकर अगले दिन सुबह 8:28 बजे तक रहेगी। इसके बाद अष्टमी तिथि का आरंभ होगा। शनिवार को सूर्योदय सुबह 6:28 बजे और सूर्यास्त शाम 5:56 बजे होगा। चंद्रोदय दोपहर 12:13 बजे और चंद्रास्त रात 10:55 बजे होगा।
शारदीय नवरात्र का महत्व
17 अक्टूबर 2026 (शनिवार) को शारदीय नवरात्र का सातवां दिन है, जब मां कालरात्रि की उपासना की जाएगी। मां कालरात्रि को देवी दुर्गा की सातवीं शक्ति और नवदुर्गा का सबसे भयंकर रूप माना जाता है। इस दिन मां कालरात्रि की विशेष पूजा की जाती है, जिससे भूत, प्रेत, राक्षस और नकारात्मक ऊर्जाएं दूर होती हैं।
सूर्य देव और ज्योतिषीय प्रभाव
पंचांग के अनुसार, इस दिन सूर्य देव चित्रा नक्षत्र में रहेंगे। ज्योतिष के अनुसार, जब सूर्य चित्रा नक्षत्र में होते हैं, तो इसके गहरे प्रभाव देखने को मिलते हैं। चित्रा नक्षत्र का स्वामी मंगल ग्रह है, जिसे सूर्य का मित्र माना जाता है। इस मेल से आत्मविश्वास, साहस और ऊर्जा में वृद्धि होती है। नौकरीपेशा लोगों को उच्च अधिकारियों द्वारा सराहना मिल सकती है।
अतिगंड योग और अभिजीत मुहूर्त
शनिवार रात 11:02 बजे तक अतिगंड योग रहेगा, जिसे संघर्षपूर्ण और अशुभ माना जाता है। इस योग में जन्मे बच्चों के लिए शांति कराना आवश्यक होता है। वहीं, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:49 से दोपहर 12:35 बजे तक रहेगा, जो दिन का सबसे शुभ समय माना जाता है।
अमृतकाल और राहुकाल
शनिवार को रात 2:34 से तड़के 4:22 बजे तक अमृतकाल रहेगा, जो अत्यंत शुभ समय है। इस दौरान किए गए कार्यों में सफलता की संभावना अधिक होती है। वहीं, राहुकाल सुबह 9:20 से 10:46 बजे तक रहेगा, जिसे नए कार्यों की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है।
यमगंड काल और गुलिक काल
यमगंड काल दोपहर 1:38 से 3:04 बजे तक रहेगा, जो नए कार्यों के लिए अशुभ माना जाता है। गुलिक काल सुबह 6:28 से 7:54 बजे तक रहेगा, जिसमें नए कार्यों से बचना चाहिए।
सूर्य का राशि परिवर्तन
शनिवार को सूर्य देव कन्या राशि से निकलकर तुला राशि में प्रवेश करेंगे। तुला राशि में सूर्य की ऊर्जा में कमी आती है, जिससे आत्मविश्वास में उतार-चढ़ाव आ सकता है।
चंद्रमा की स्थिति
इस दिन चंद्रमा सुबह 06:47 बजे तक वृश्चिक राशि में रहेगा, फिर धनु राशि में प्रवेश करेगा। धनु राशि में चंद्रमा की स्थिति व्यक्ति के मन और स्वभाव पर सकारात्मक प्रभाव डालती है।
दिशाशूल और यात्रा
शनिवार को दिशाशूल पूर्व दिशा में रहेगा, जो यात्रा के लिए अशुभ माना जाता है।