अधिक मास: हिंदू धर्म में पुरुषोत्तम माह का महत्व और विशेष एकादशियां
अधिक मास, जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। यह हर तीन साल में एक बार आता है और इस बार इसकी शुरुआत 17 मई 2026 को हुई है। इस दौरान भगवान विष्णु की पूजा करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है। इस लेख में हम अधिक मास की विशेषताओं, पद्मिनी और परमा एकादशी की तिथियों, उनके महत्व और पूजा विधि के बारे में जानेंगे। जानें कैसे ये एकादशियां आपके जीवन में सुख और समृद्धि ला सकती हैं।
May 22, 2026, 17:17 IST
अधिक मास का महत्व
हिंदू धर्म में अधिक मास को अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता है, जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, यह हर तीन साल में एक बार आता है। इस वर्ष, अधिक मास की शुरुआत 17 मई 2026 को हुई और यह 15 जून 2026 तक चलेगा। इस दौरान भगवान विष्णु की पूजा करना विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है, जिससे जीवन में सुख और समृद्धि बनी रहती है।
अधिक मास की विशेषताएं
सामान्य वर्ष में 12 महीने और 24 एकादशियां होती हैं, जबकि अधिक मास वाले वर्ष में 13 महीने और 26 एकादशियां होती हैं। इस बार ज्येष्ठ का महीना अधिकमास होने के कारण 30 के बजाय 60 दिनों का होगा, जिससे सामान्य 2 एकादशियों का शुभ संयोग भी बनेगा।
अधिक मास क्या है?
हिंदू पंचांग चंद्रमा की गति पर आधारित होता है, जबकि सूर्य कैलेंडर सूर्य की चाल के अनुसार चलता है। दोनों में हर वर्ष लगभग 11 दिनों का अंतर होता है। इस असमानता को संतुलित करने के लिए हर तीन साल में एक अतिरिक्त माह जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास, पुरुषोत्तम मास या मलमास कहा जाता है।
विशेष एकादशियां
इस विशेष माह में 27 मई 2026 को पद्मिनी एकादशी और 11 जून 2026 को परमा एकादशी का व्रत रखा जाएगा। ये एकादशियां आध्यात्मिक उन्नति, धन-वैभव और मोक्ष के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को इन दोनों एकादशियों के व्रत का महत्व बताया था।
पद्मिनी एकादशी
-तिथि: 27 मई 2026 (बुधवार)
-पक्ष: अधिकमास का शुक्ल पक्ष
-विधि: यह व्रत दशमी तिथि से प्रारंभ होता है। दशमी को कांसे के बर्तन में जौ-चावल का भोजन करना चाहिए और नमक का त्याग करना चाहिए।
-महत्व: यह एकादशी सभी प्रकार की इच्छाओं को पूरा करती है और व्यक्ति को कीर्ति, वैभव और संतान सुख प्रदान करती है।
परमा एकादशी
-तिथि: 11 जून 2026 (गुरुवार)
-पक्ष: अधिकमास का कृष्ण पक्ष
-विशेष कर्म: इस दिन स्वर्ण दान, विद्या दान, अन्न दान, भूमि दान और गौदान का विशेष महत्व है।
-महत्व: यह व्रत सर्वोच्च सुख और समृद्धि की प्राप्ति कराता है।
एकादशी की पूजा विधि
अधिक मास की इन विशेष एकादशियों की पूजा विधि लगभग समान होती है। व्रत की पूर्व संध्या पर सात्विक भोजन करें और कांसे के बर्तन में भोजन करें। एकादशी के दिन सूर्योदय से पहले स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें।
भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति स्थापित करें और उन्हें पीले चंदन, फूल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
पूरे दिन 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जाप करें और दान करें। द्वादशी के दिन व्रत का पारण करें।