आरएसएस के मोहन भागवत ने नई शिक्षा नीति और परिवार के महत्व पर की चर्चा
आरएसएस का व्याख्यानमाला कार्यक्रम
नई दिल्ली - विज्ञान भवन में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के व्याख्यानमाला कार्यक्रम ‘100 वर्ष की संघ यात्रा नए क्षितिज’ का गुरुवार को समापन हुआ। इस अवसर पर आरएसएस के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने नई शिक्षा नीति की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
नई शिक्षा नीति का महत्व
डॉ. भागवत ने कहा, “नई शिक्षा नीति की शुरुआत इसलिए की गई, क्योंकि अतीत में विदेशी आक्रमणकारियों ने हमारे देश पर शासन किया। उनका उद्देश्य केवल नियंत्रण स्थापित करना था, विकास नहीं। अब जब हम स्वतंत्र हैं, हमारा लक्ष्य केवल शासन करना नहीं, बल्कि अपने लोगों की सेवा करना है।” उन्होंने यह भी कहा कि तकनीक और आधुनिकता का स्वागत किया जाना चाहिए, लेकिन इसका उपयोग मानवता के लाभ के लिए होना चाहिए।
भाजपा और संघ के संबंध
भागवत ने स्पष्ट किया कि भाजपा और संघ के बीच कोई विवाद नहीं है। उन्होंने कहा, “हमारी सरकारों के साथ अच्छे संबंध हैं। यह कहना गलत है कि संघ सरकार के सभी निर्णय लेता है। हम सलाह दे सकते हैं, लेकिन निर्णय सरकार ही लेती है।”
परिवार के लिए तीन बच्चों की आवश्यकता
उन्होंने यह भी कहा कि सभी परिवारों को तीन बच्चे पैदा करने चाहिए ताकि परिवार व्यवस्था और देश की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
अंग्रेजी भाषा का महत्व
भागवत ने कहा, “हम अंग्रेज नहीं हैं और हमें अंग्रेज बनने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन अंग्रेजी एक भाषा है और इसे सीखने में कोई बुराई नहीं है। मैंने कई अंग्रेजी उपन्यास पढ़े हैं, लेकिन इससे मेरे हिंदुत्व के प्रति प्रेम पर कोई असर नहीं पड़ा।” उन्होंने कहा कि हमें अपनी परंपराओं और मूल्यों को बनाए रखना चाहिए, चाहे धर्म अलग हो।