ईरान के हमले से कतर की LNG आपूर्ति में बाधा, वैश्विक ऊर्जा बाजार पर प्रभाव
ईरान का हमला और कतर की LNG रिफाइनरी
नई दिल्ली: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच, ईरान ने इजरायल और अमेरिका के साथ-साथ खाड़ी देशों को भी अपने निशाने पर लेना शुरू कर दिया है। बुधवार रात, ईरान ने कतर के प्रमुख तेल और गैस प्रतिष्ठानों पर हमला किया, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल मच गई। इस हमले में कतर की रास लफान स्थित LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) रिफाइनरी को गंभीर नुकसान हुआ है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार, कतर की कुल LNG निर्यात क्षमता का लगभग 17 प्रतिशत प्रभावित हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस नुकसान की भरपाई और मरम्मत में तीन से पांच साल लग सकते हैं।
कतर एनर्जी के सीईओ और ऊर्जा मामलों के मंत्री साद शेरिदा अल-काबी ने बताया कि 18 और 19 मार्च 2026 को हुए मिसाइल हमलों में उत्पादन सुविधाओं को गंभीर क्षति पहुंची है। इसके परिणामस्वरूप, कंपनी को कुछ दीर्घकालिक LNG अनुबंधों पर ‘फोर्स मेज्योर’ घोषित करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि इस हमले से कतर को सालाना लगभग 20 अरब डॉलर के राजस्व का नुकसान हो सकता है।
हमले में LNG उत्पादन की दो प्रमुख यूनिट—ट्रेन 4 और ट्रेन 6—क्षतिग्रस्त हुई हैं, जिनकी संयुक्त उत्पादन क्षमता 12.8 मिलियन टन प्रति वर्ष है। यह कतर के कुल LNG निर्यात का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस घटना का सबसे बड़ा असर भारत पर पड़ने की संभावना है, क्योंकि भारत अपनी कुल LNG जरूरत का लगभग 47 प्रतिशत कतर से आयात करता है। वर्ष 2024 में भारत ने कुल 27.8 मिलियन मीट्रिक टन LNG आयात किया था, जिसमें से 11.30 MMT कतर से आया था।
आपूर्ति में इस व्यवधान से भारत में गैस की उपलब्धता और कीमतों पर सीधा असर पड़ सकता है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो घरेलू बाजार में गैस की कीमतें बढ़ सकती हैं और उद्योगों पर दबाव बढ़ेगा। कतर के अलावा, इस संकट का असर चीन, दक्षिण कोरिया, इटली और बेल्जियम जैसे देशों पर भी पड़ेगा, जो LNG आयात के लिए कतर पर निर्भर हैं।