उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन का आईजीएनएफए में IFS परिवीक्षार्थियों को संबोधन
उपराष्ट्रपति का संबोधन
उत्तराखंड: उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज देहरादून में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी (आईजीएनएफए) में भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के 2025-2027 बैच के परिवीक्षार्थियों और रॉयल भूटान वन सेवा के अधिकारियों को संबोधित किया।
उपराष्ट्रपति ने प्रशिक्षुओं को बधाई देते हुए कहा कि वे आने वाले दशकों में भारत के वनों, वन्यजीवों, जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाएंगे।
उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय वन सेवा का योगदान देश की पारिस्थितिक सुरक्षा को मजबूत करने और 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण होगा।
LIVE: आदरणीय उप राष्ट्रपति श्री @CPR_VP जी के साथ FRI, देहरादून में आयोजित आई.एफ.एस. परिवीक्षार्थियों से संवाद कार्यक्रम में सहभगिताhttps://t.co/wStdap9kYQ
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) August 19, 2026
उपराष्ट्रपति ने कहा कि विकास और संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं और दोनों को संतुलित करना आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों से संरक्षण और विकास के बीच संतुलन बनाने का आग्रह किया।
उन्होंने व्यक्तिगत उत्कृष्टता के बजाय टीम की उत्कृष्टता पर जोर देते हुए कहा कि सामूहिक प्रयास ही राष्ट्रों और संस्थानों का निर्माण करते हैं। पारंपरिक ज्ञान का सम्मान करने की आवश्यकता पर भी उन्होंने बल दिया।
उपराष्ट्रपति ने लोक सेवा में सत्यनिष्ठा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि कठिन निर्णयों में संविधान, कानून और जनहित का मार्गदर्शन होना चाहिए।
उन्होंने वानिकी में प्रौद्योगिकी की भूमिका को भी उजागर किया और अधिकारियों से नई तकनीकों को अपनाने का आह्वान किया।
उपराष्ट्रपति ने वन सेवाओं में महिलाओं की भागीदारी की सराहना की, यह बताते हुए कि वर्तमान बैच में लगभग 17 प्रतिशत महिलाएं हैं।
अधिकारियों को अपने करियर का आकलन उनके योगदान के आधार पर करने की सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रहित हमेशा सर्वोपरि होना चाहिए।
इस अवसर पर उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त), मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी, आईजीएनएफए के निदेशक डॉ. राजेंद्र प्रसाद और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।