गंगा सप्तमी पर्व: महत्व, तिथि और पूजा विधि
गंगा सप्तमी का महत्व
हिंदू धर्म में गंगा सप्तमी का पर्व अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह पर्व हर साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन मां गंगा का धरती पर प्रकट होना माना जाता है। इस वर्ष, गंगा सप्तमी 23 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन गंगा की पूजा और स्नान करने से सभी पापों का नाश होता है, साथ ही पितरों को शांति मिलती है और जीवन में सुख-शांति का संचार होता है। इस लेख में हम गंगा सप्तमी की तिथि, मुहूर्त, पूजा विधि और इसके महत्व के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे।
तिथि और मुहूर्त
वैदिक पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि 22 अप्रैल की रात 10:48 बजे से शुरू होगी और 23 अप्रैल की रात 08:00 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के अनुसार, 23 अप्रैल 2026 को गंगा सप्तमी का पर्व मनाया जाएगा।
इस दिन का शुभ मुहूर्त सुबह 04:20 से 05:04 बजे तक रहेगा, जो गंगा में स्नान के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है। यदि आप गंगा में स्नान करने नहीं जा सकते, तो आप अपने स्नान के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं, जिससे मां गंगा की कृपा प्राप्त होगी। गंगा पूजन का शुभ मुहूर्त सुबह 11:01 से दोपहर 01:38 बजे तक रहेगा।
पूजन विधि
इस दिन सुबह जल्दी स्नान करने के बाद स्वच्छ कपड़े पहनें। फिर एक तांबे के लोटे में जल लेकर उसमें गंगाजल मिलाएं और सूर्य देव को अर्घ्य दें। इसके बाद मंदिर में बैठकर मन में मां गंगा का ध्यान करें। 'ॐ नमो गंगायै विश्वरूपिणी नारायणी नमो नम:' मंत्र का 108 बार जाप करें। इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को दान देना भी महत्वपूर्ण है।